Delhi Blast Terror: दिल्ली में हुए धमाकों को लेकर जांच एजेंसियों को अब कुछ अहम बातें पता चली हैं. जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे सिर्फ हिंसा फैलाना ही नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश देना भी मकसद था. आरोपी इजराइल-गाजा विवाद को लेकर अपनी कट्टर सोच दिखाना चाहते थे और इसी वजह से देश की राजधानी को निशाना बनाया गया.
बड़े रेस्तरां पर हमला करने की थी योजना
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, इस मॉड्यूल की योजना दिल्ली और देश के अन्य बड़े ईटिंग ज्वाइंट्स पर हमला करने की थी. इन जगहों को चुनने का मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों का ध्यान खींचना और अपनी बात दुनिया तक पहुंचाना था. आरोपी चाहते थे कि उनके हमले की गूंज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक सुनाई दे.

आरोपियों और सुसाइड बॉम्बर के बीच मतभेद
जांच में यह भी पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी मुजम्मिल आदिल और शाहीन के, धमाकों में मारे गए सुसाइड बॉम्बर उमर से वैचारिक मतभेद थे. सोच में फर्क होने के कारण ये लोग और ज्यादा बड़ा संदेश देना चाहते थे. इसी वजह से उन्होंने ऐसे ठिकानों को चुनने की योजना बनाई, जहां आम लोग बड़ी संख्या में आते हैं.
पुराने आतंकी संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश
जांच एजेंसियों का कहना है कि उमर से अलग यह तीन लोगों का मॉड्यूल आतंकी संगठन अंसार उल गजावत ए हिंद को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था. यह संगठन अलकायदा की सोच से जुड़ा रहा है. इसका टॉप कमांडर जाकिर मूसा साल 2019 में मारा गया था. इसके बाद 2021 में एक और बड़ा कमांडर भी मारा गया. ज्यादातर नेतृत्व खत्म हो जाने के बाद संगठन कमजोर पड़ गया था, जिसे ये लोग फिर से खड़ा करना चाहते थे.
और किन-किन जगहों को बनाया गया था निशाना
बड़े ईटिंग आउटलेट को निशाना बनाकर आरोपी यह दिखाना चाहते थे कि उनकी सोच कितनी कट्टर है. साथ ही उनका इरादा भारत के युवाओं को गुमराह करने का भी था. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनके निशाने पर और कौन-कौन से संस्थान थे और आगे क्या-क्या योजनाएं बनाई जा रही थीं.
20 दिन तक चली थी जांच
लाल किले में हुए कार धमाके से पहले जम्मू और कश्मीर पुलिस ने करीब 20 दिन तक गहन जांच की थी. यह जांच दो आतंकी संगठनों, जैश-ए-मोहम्मद और AguH से जुड़े एक मॉड्यूल को पकड़ने के लिए की जा रही थी. 19 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा एक पर्चा मिलने के बाद जांच शुरू हुई थी.
पोस्टर से खुली पूरी साजिश
इस पोस्टर में स्थानीय लोगों से पुलिस का सहयोग न करने और पुलिस को दुकानों में घुसने से रोकने की अपील की गई थी. इसी सुराग के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस शोपियां में एक मौलवी तक पहुंची. इसके बाद 9 और 10 नवंबर 2025 को फरीदाबाद में छापेमारी के दौरान पूरी आतंकी साजिश का खुलासा हुआ. इस कार्रवाई में करीब 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री और आधुनिक हथियार बरामद किए गए.
जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है. जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की तलाश में जुटी हैं, ताकि आगे किसी भी बड़े हमले को समय रहते रोका जा सके.



















