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ED का बड़ा एक्शन: NPCC रिश्वत कांड में राकेश मोहन कोतवाल सहित कई के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

गुवाहाटी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने NPCC लिमिटेड (नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) से जुड़े एक बहुचर्चित रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में असम के गुवाहाटी स्थित विशेष (PMLA) अदालत में अपनी अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। यह मामला भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए आवंटित बॉर्डर आउट पोस्ट के निर्माण से जुड़ा है।

प्रमुख आरोपी और मामला

ED ने जिन लोगों के खिलाफ PMLA अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • राकेश मोहन कोतवाल: सेवानिवृत्त जोनल मैनेजर, NPCC लिमिटेड (पूर्वोत्तर क्षेत्र)।
  • लतीफुल पाशा: प्रभारी अधिकारी, जलपाईगुड़ी प्रोजेक्ट ऑफिस।
  • अनीश बैद और बिनोद सिंघी: निदेशक, M/s. श्री गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड।
  • अन्य: M/s. जयचंद लाल सिंघी, सुनील कुमार और M/s. श्री गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड।

क्या है पूरा मामला?

जांच के अनुसार, NPCC लिमिटेड ने श्री गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी को लगभग 60.30 करोड़ रुपये के 9 बॉर्डर आउट पोस्ट के निर्माण का ठेका दिया था। आरोप है कि राकेश मोहन कोतवाल और लतीफुल पाशा ने कंपनी के अटके हुए बिल (लगभग 2.24 करोड़ रुपये) जारी करने के बदले 33 लाख रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की थी, जो बाद में 30 लाख रुपये पर तय हुई।

हवाला और बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल

ED की जांच में खुलासा हुआ कि रिश्वत की राशि को ठिकाने लगाने के लिए हवाला और बैंकिंग चैनलों का जाल बुना गया था।

  • हवाला कनेक्शन: 25 लाख रुपये की रकम ‘हवाला’ के जरिए सिलीचर-गुवाहाटी-दिल्ली भेजी गई।
  • सीबीआई की कार्रवाई: 14 जुलाई 2019 को दिल्ली के होटल डियर पार्क में सीबीआई ने इस लेनदेन को रंगे हाथों पकड़ा और 25 लाख रुपये बरामद किए।
  • अतिरिक्त बरामदगी: जांच में 15 लाख रुपये की अतिरिक्त अवैध राशि भी बरामद की गई, जो सिलीचर स्थित ‘सिंघी हुंडई शोरूम’ से मिली थी। यह रकम राकेश मोहन कोतवाल ने ठेकेदारों से ली थी।

जांच का दायरा बढ़ा

ED की जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी राकेश मोहन कोतवाल और लतीफुल पाशा ने न केवल श्री गौतम कंस्ट्रक्शन कंपनी, बल्कि NPCC के कई अन्य ठेकेदारों से भी अवैध वसूली की थी। यह पूरी जांच CBI द्वारा दर्ज की गई FIR (AC-I, नई दिल्ली) पर आधारित है, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी कार्रवाई शुरू की थी।

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