नई दिल्ली। देश के कृषि परिदृश्य में इन दिनों ‘काला टमाटर‘ (Black Tomato) चर्चा का केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इसकी सफल खेती ने किसानों के लिए मुनाफे के नए द्वार खोल दिए हैं। अपने अनूठे स्वाद, स्वास्थ्यवर्धक गुणों और ऊंचे बाजार मूल्य के कारण यह एग्री-बिजनेस में सबसे आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है।
मूलतः ब्रिटेन की यह फसल अब भारतीय खेतों की रंगत बदल रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंकित सिंह भदौरिया (KVK, कासगंज) के अनुसार, यह न केवल एक फसल है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने का एक सशक्त जरिया भी है।
क्यों खास है काला टमाटर?
काले टमाटर का गहरा रंग इसमें मौजूद ‘एंथोसायनिन‘ नामक प्राकृतिक वर्णक के कारण होता है। यह टमाटर शुरुआत में हरा होता है, फिर लाल-नीले रंग में बदलता है और पूरी तरह पकने पर गहरा काला हो जाता है। इसका स्वाद हल्का मीठा और खट्टापन लिए होता है, जो इसे सलाद और प्रीमियम व्यंजनों के लिए पहली पसंद बनाता है।
सेहत का खजाना:
- कैंसर से बचाव: इसमें मौजूद फेनोलिक यौगिक कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में सहायक हैं।
- दिल की सेहत: एंटी-ऑक्सीडेंट्स और पोटेशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं।
- शुगर कंट्रोल: फाइबर और एंथोसायनिन शरीर में शुगर लेवल को संतुलित रखते हैं।
- आंखों की रोशनी: विटामिन-A और C से भरपूर होने के कारण यह आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है।
खेती का सही समय और तरीका
काले टमाटर की खेती काफी हद तक सामान्य टमाटर जैसी ही है, लेकिन कुछ तकनीकी बारीकियों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- बुआई का समय: रबी फसल के लिए नर्सरी अगस्त-सितंबर में तैयार की जाती है। वहीं, वसंत ऋतु की फसल के लिए फरवरी से अप्रैल की शुरुआत तक बुआई की जा सकती है।
- जलवायु और मिट्टी: इसके लिए 27-30 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी (PH मान 6-7) इसके लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
- धूप की जरूरत: बेहतर रंग और गुणवत्ता के लिए पौधों को रोजाना 6-8 घंटे की सीधी धूप मिलना अनिवार्य है।
लागत कम, मुनाफा बंपर
काले टमाटर की फसल लगभग 100 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। उचित प्रबंधन से एक हेक्टेयर में 250-300 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है।
“बाजार में काला टमाटर सामान्य लाल टमाटर की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक कीमत पर बिकता है। दिसंबर से फरवरी के बीच, जब इसकी मांग चरम पर होती है, किसान इससे जबरदस्त मुनाफा कमा सकते हैं।”
— डॉ. अंकित सिंह भदौरिया, कृषि वैज्ञानिक
प्रमुख प्रजातियां
भारतीय किसान इन प्रमुख किस्मों को अपनाकर बेहतर उत्पादन ले सकते हैं:
- इंडिगो रोज (Indigo Rose)
- ब्लैक ब्यूटी (Black Beauty)
- चेरोकी पर्पल (Cherokee Purple)
- ब्लैक क्रीम और ब्लैक चेरी।
किसानों के लिए टिप्स:
- सिंचाई: नियमित लेकिन संतुलित सिंचाई करें। जलभराव से जड़ें गलने का खतरा रहता है।
- खाद: मृदा परीक्षण (Soil Test) के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
- नर्सरी प्रबंधन: उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में सितंबर की पौध को अक्टूबर-नवंबर में खेत में रोपें।




















