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छत्तीसगढ़ में पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त, भिलाई पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

दुर्ग पुलिस ने नशा मुक्ति अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए छत्तीसगढ़ में पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा जप्त किया है. थाना भिलाई नगर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बोरसी रोड स्थित बीज विकास निगम के पास कुछ लोग अवैध मादक पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त

पुलिस ने घेराबंदी कर विक्रम साहू और यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया. इनके कब्जे से 2 किलो सामान्य गांजा और उच्च गुणवत्ता वाला 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुआ है। इसके अलावा पुलिस ने नशा सेवन में प्रयुक्त गोगो पेपर, चिलम, मोबाइल और 40,000 रुपये नगद सहित कुल 1.75 लाख रुपये का मशरुका जप्त किया है. आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.

क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा?

यह गांजा मिट्टी के बिना सिर्फ पानी और खास पोषक तत्वों की मदद से लैब या बंद कमरों में उगाया जाता है. यह आम गांजे के मुकाबले कई गुना ज्यादा नशीला और महंगा होता है. हाइड्रोपोनिक्स में जड़ों को सीधे खनिज युक्त पानी में रखा जाता है. इसमें मिट्टी की जगह कोको कॉयर, रॉकवूल या पेर्लाइट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है, जो केवल जड़ों को सहारा देते हैं, पोषण नहीं. इसे उगाने के लिए एक इंडोर सेटअप की आवश्यकता होती है. इसके लिए एक बड़ा टैंक जिसमें पानी और पोषक तत्व भरे होते हैं.

मिट्टी की कमी और बंद कमरे में होने के कारण शक्तिशाली LED या HPS लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जो सूर्य के प्रकाश की कमी को पूरा करती हैं. पानी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे रसायनों का सटीक मिश्रण मिलाया जाता है. पानी में एयर पंप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है ताकि जड़ें सड़ें नहीं. मिट्टी न होने से कीड़े और बीमारियों का खतरा कम रहता है. बिजली का भारी बिल, महंगे उपकरण और विशेष पोषक तत्वों के कारण इसे उगाने का खर्च बहुत ज्यादा आता है.

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