भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को एक विशेष कॉमर्शियल मिशन के तहत अपने सबसे भारी प्रक्षेपण यान LVM3-M6 के जरिए अमेरिकी संचार उपग्रह BlueBird Block-2 को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में स्थापित किया। इस रॉकेट में दो शक्तिशाली S200 सॉलिड बूस्टर लगे थे।
24 घंटे की उलटी गिनती के बाद 43.5 मीटर ऊंचा रॉकेट सुबह 8.55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरा। 6,100 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह LVM3 के इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (LEO) में स्थापित किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी पेलोड बन गया। इससे पहले सबसे भारी पेलोड LVM3-M5 संचार उपग्रह था, जिसका वजन लगभग 4,400 किलोग्राम था।
यह मिशन NewSpace India Limited (NSIL) और अमेरिका स्थित AST SpaceMobile के बीच वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया गया। NSIL, ISRO की वाणिज्यिक इकाई है। प्रक्षेपण से पहले ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने 22 दिसंबर को तिरुमला में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा अर्चना की थी।
अंतरिक्ष में उपग्रह कैसे करेगा काम?
BlueBird Block-2 अगली पीढ़ी का ऐसा संचार उपग्रह है, जिसे सीधे स्मार्टफोन को उच्च गति वाली सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है। AST SpaceMobile अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क बना रहा है, जो स्मार्टफोन के माध्यम से उपलब्ध होगा और वाणिज्यिक एवं सरकारी दोनों ऐप्लीकेशन के लिए काम करेगा।
LVM3 तीन चरणों वाला रॉकेट है जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा है। इसे ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर ने विकसित किया है। प्रक्षेपण के लिए आवश्यक थ्रस्ट देने हेतु रॉकेट में दो S200 ठोस बूस्टर लगाए गए हैं, जिन्हें विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम ने विकसित किया है। प्रक्षेपण के लगभग 15 मिनट बाद उपग्रह को रॉकेट से अलग किया गया।
BlueBird Block-2 उपग्रह के जरिए मोबाइल कनेक्टिविटी कहीं भी, कभी भी उपलब्ध होगी। यह नेटवर्क 4G और 5G वॉइस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं प्रदान करेगा। AST SpaceMobile ने सितंबर 2024 में BlueBird-1 से 5 तक पांच उपग्रह प्रक्षेपित किए थे, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में निरंतर इंटरनेट कवरेज प्रदान कर रहे हैं। कंपनी अब अपने नेटवर्क को मजबूत करने और दुनिया भर के 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है।



















