छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया. इस दौरान उन्होंने जनता को संबोधित भी किया. उन्होंंने जय जोहार से सबसे पहले सबका अभिवादन किया. साथ ही इस आयोजन और प्रदेश को लेकर कहा कि यहां संस्कृति की भव्यता है.
‘जय जोहार…यहां मुझे अपने घर जैसा लगता है’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा- ‘जय जोहार, देवी दंतेश्वरी की जय. सियान सजन के जोहार, पिला मन के मोचो आशीर्वाद. बस्तर पंडुम में उपस्थित होकर बहुत खुशी हो रही है. इसे मैं अपना सौभाग्य मानती हूं. सभी लोगो को धन्यवाद देना चाहती हूं. मेरा 5 हजार से अधिक बच्चों ने स्वागत किया. सभी का धन्यवाद. एयरपोर्ट से उतरकर आते समय मुझे छत्तीसगढ़ की संस्कृति दिखी. इसीलिए यहां के लोगों और परंपरा को नमन करती हूं. यहां आने से मुझे अपने घर जैसा लगता है.’
‘संस्कृति की भव्यता है’
उन्होंने आगे कहा- ‘ बस्तर के वीरों को नमन करती हूं. स्टॉल में पहले देवी देवता यहां की कला, कल्चर, व्यंजन और अन्य चीजें देखने को मिला. भारत मे छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां संस्कृति की भव्यता है. छत्तीसगढ़ आदिवासी जनता से परिपूर्ण है. यह पुराना और बहुत मीठा है. यह सभी एक साथ उत्सव मनाने के लिए आगे आते हैं. मौसम बदलने के बाद पतझड़ होकर आम में फूल आता है. तब यह पंडुम होता है. पिछले साल बस्तर पंडुम की झलक को देशभर के लोगों ने देखा है. इस साल 50 हजार से अधिक लोग जुड़े. इसकी झलक आते ही मैंने देखा. इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं. गुफाएं और जलप्रपात बस्तर में सक्षम है, जहां पर्यटक आएंगे. दुनियाभर में होम स्टे काफी काम कर रहा है.’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा- ‘4 दशक से यह क्षेत्र माओवादियों से ग्रस्त था. सबसे अधिक नुकसान युवाओं और लोगों को वर्षो से हुआ. बस्तर में अविश्वास और भय का रास्ता समाप्त हुआ. नागरिकों में शांति लौट रहे हैं. माओवादियों बड़ी संख्या में सरेंडर कर रहे है. जो सरेंडर कर रहे हैं उनके लिए विशेष कार्य किया जा रहा है. इस क्षेत्र में नियद नेल्लानार योजना काम कर रही है. गांव में सड़क बिजली की सुविधा हो रही है. स्कूल में बच्चे पढ़ाई कर रहे है. सरेंडर करने वाले सभी माओवादियों का स्वागत करती हूं. जो लोग बरगला रहे हैं उनके ऊपर विश्वास न करें. लोकतंत्र की ताकत यह है ओडिशा के एक छोटे से गनब की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति के रूप में संबोधित कर रही हूं. आप लोगो मे अधिक ताकत और हौसला है. इसीलिए पढ़ाई करें, मुख्यधारा में लौटे. आगे बढ़े.’
उन्होंने आगे कहा- ‘ जो पीछे है उन्हें आगे करना सरकार का योजना है. शिक्षा व्यक्तिगत और सामाजिक का आधारशिला है. जनजातियों क्षेत्र के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें इसीलिए एकलव्य जैसे विद्यालय खोले गए. पद्मश्री अवार्ड में गोडबोले सहित अन्य बस्तर से चयनित हुए. निस्वार्थ सेवा करने वाले समाज को आगे बढ़ाते है. बस्तर संस्कृति बस्तर दशहरा बड़ा मॉडल है. मैं राज्य के सभी निवासियों से निवेदन करती हूं. बस्तर के इस क्षेत्र में काफी प्राकर्तिक संपदा है. राज्य और केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनोओ का युवा फायदा उठाये. और आगे बढ़े. इससे भारतमाता का गौरव आगे बढ़ेगा. धन्यवाद. जय हिंद जय भारत, छत्तीसगढ़िया सबल बढ़िया. जय छत्तीसगढ़.’



















