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महाकुंभ में योगी-मोदी की डुबकी से क्या ‘हारे’ केजरीवाल…जानिए आप की ‘पराजय’ के 10 बड़े कारण

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के 70 सीटों के नतीजों के रुझान आने शुरू हो गए हैं. महाराष्ट्र और हरियाणा में प्रचंड जीत हासिल करने वाली भाजपा के हौसले दिल्ली चुनावों के मतगणना के रुझानों से बुलंद हैं. इसमें बीजेपी 40 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही है. आपको याद होगा कि महाराष्ट्र जीत के बाद ही भाजपा नेताओं ने यह कहना शुरू कर दिया था कि’महाराष्ट्र तो झांकी है, दिल्ली जीतना बाकी है’. दिल्ली चुनाव से कुछ महीने पहले ही दिल्ली भाजपा ने महाराष्ट्र चुनाव का परिणाम आने के साथ ही दिल्ली में ‘परिवर्तन यात्रा’ शुरू कर दी थी. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा हरियाणा और महाराष्ट्र में हिट साबित हुआ.

दिल्ली चुनाव में भी यह नारा हिट होने की उम्मीद की जा रही है. दिल्ली में योगी की खूब रैलियां भी हुईं और जिनमें बड़ी भीड़ उमड़ी. साथ में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अपनी रैलियों में आप नहीं आपदा का नारा गढ़ा, जो हर ओर चर्चा का विषय बन गया. क्या केजरीवाल के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी या योगी-मोदी की जुगलबंदी ने दिल्ली में सत्ता परिवर्तन किया. जानते हैं-

मोदी का ‘आप नहीं आपदा’ का नारा क्या हिट रहा

दिल्ली भाजपा ने शुरुआत से ही कथित शराब घोटाले और मुख्यमंत्री आवास में हुए भारी-भरकम खर्च के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल को घेरा. परिवर्तन यात्रा में भाजपा के दिग्गज नेता इन्हीं मुद्दों पर जनता का ध्यान खींचने की कोशिश की. दिल्ली के विधानसभा चुनाव प्रचार में भी ‘बंटोगे तो कटोगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ का नारा भी गूंजता रहा है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में आप को आपदा करार दिया था, जो लोगों की जुबान पर चढ़ गया.

योगी की महाकुंभ में डुबकी और केजरीवाल को चुनौती

2020 और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ा फर्क आया है. 2020 तक अरविंद केजरीवाल की छवि एक ईमानदार नेता की बनी हुई थी. लेकिन जिस तरह अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले के जाल में फंसे हैं, उससे उनकी छवि को बहुत बड़ा धक्का लगा है. इसके अलावा, इस बार यमुना नदी की गंदगी पर भी आप बुरी तरह फंसी हुई थी. खासकर योगी ने जिस तरह से कुंभ में डुबकी लगाकर दिल्ली में आकर अरविंद केजरीवाल से यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती दी थी, वो लोगों ने हाथोंहाथ लिया. आम लोग भी यही कहते नजर आए कि केजरीवाल क्यों नहीं यमुना में डुबकी लगाते. केजरीवाल ने यमुना के लिए कुछ नहीं किया.

चुनाव के दिन मोदी का महाकुंभ स्नान का भी गया मैसेज

5 फरवरी को दिल्ली में वोट पड़ रहे थे और उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संगम में डुबकी लगाने महाकुंभ, प्रयागराज पहुंच गए. मोदी की इस डुबकी का जनता में मैसेज गया. बीजेपी के पक्ष में वोटरों को अपना वोट डालने के लिए प्रेरित किया होगा.

मिडिल क्लास को 12 लाख तक की कमाई पर टैक्स से छूट

बीजेपी की इस बढ़त के पीछे एक बड़ी वजह बजट में इस बार मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देना था. इस बार मध्यम वर्ग को मोदी सरकार ने 12 लाख तक की सालाना कमाई को टैक्स फ्री करने से भी बड़ी संख्या में बीजेपी के पक्ष में वोट देने लोग सामने आए. इसने मध्यम वर्ग को वोटिंग के लिए प्रोत्साहित किया.

केजरीवाल अपने दामन से नहीं छुड़ा पाए ‘दाग’

मुख्यमंत्री आवास में भारी भरकम खर्च करने का मामला जिस तरह सामने आया है, उससे केजरीवाल की उस छवि को गहरी चोट पहुंची है जो उन्हें एक बहुत ईमानदार नेता बनाता था. मगर, केजरीवाल अपनी छवि जनता के सामने साफ नहीं कर पाए. उनके शीशमहल को लेकर बहुत हंगामा मचा और जनता में यह संदेश गया कि खुद को ईमानदार बताने वाले केजरीवाल इतने आलीशान बंगले में कैसे रहते है.

वक्फ बोर्ड का मसला दिल्ली में खूब उछला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया था कि उसने 2014 में सत्ता से जाने से पहले वक्फ बोर्ड को दिल्ली की कई महत्त्वपूर्ण संपत्तियां सौंप दीं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि प्रधानमंत्री ने ये बातें अनायास नहीं कही हैं. वे दिल्ली के विधानसभा चुनावों की टोन सेट कर रहे थे. दिल्ली चुनाव में वक्फ बोर्ड का यह मुद्दा खूब छाया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा.

मुफ्तखोरी की राजनीति को जनता ने नकारा

अरविंद केजरीवाल ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान यह कहा था कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो मुफ्त बिजली-पानी की योजनाएं बंद कर दी जाएंगी. हालांकि, भाजपा ने भी दिल्ली में चल रही सभी सुविधाएं बरकरार रखने का वादा किया था. केजरीवाल के महिलाओं को 2100 रुपए देने के मुकाबले बीजेपी ने 2500 रुपए देने का वादा किया था. वहीं, कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं थी. मगर, दिल्ली की जनता ने दिखा दिया कि मुफ्तखोरी की राजनीति नहीं चलेगी.

ओवैसी ने किया आप का बड़ा नुकसान

आप और कांग्रेस दोनों को मुस्लिम बहुल इलाके में बड़ा नुकसान हुआ. योगी के बंटोगे तो कटोगे का नारा और मोदी का आप नहीं आपदा का नारा यहां हिट होता दिखा. कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला रहा, जिसमें बीजेपी ने बाजी मार ली. उसने यहां की ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली. दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में असदउद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी बीजेपी को तो पीछे धकेल नहीं पाई, मगर उसने इस चुनावी जंग से कांग्रेस और आप को जरूर बाहर कर दिया.

पिछली बार भाजपा को नहीं मिली थी सफलता

दिल्ली का पिछला विधानसभा चुनाव फरवरी 2020 में दिल्ली का माहौल काफी तनावपूर्ण था. शाहीन बाग से लेकर जाफराबाद मेट्रो स्टेशन तक सड़कों पर मुसलमान समुदाय के लोगों की भीड़ सीएए-एनआरसी कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के विरोध में धरना दे रही थी. कुछ नेताओं के आपत्तिजनक बयानों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया था. इससे राजधानी दिल्ली का माहौल सांप्रदायिक हो चला था. लेकिन इन परिस्थितियों में हुए चुनाव में भी भाजपा को दिल्ली में बड़ी सफलता नहीं मिली.

बीजेपी की दिल्ली की राह में क्या मुस्लिम वोटर्स

आम तौर पर दिल्ली की लगभग 22 सीटें ऐसी मानी जाती हैं जो एक संप्रदाय विशेष के प्रभाव वाली हैं. इन सीटों पर जीत किसकी होगी, यह मुस्लिम मतदाता तय करते हैं. हालांकि, भाजपा नेता ये दावा करते हैं कि जिस तरह यूपी की मुसलमान बहुल सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है, उससे इस बात का कोई मतलब नहीं रह जाता है कि भाजपा उम्मीदवार मुसलमान बहुल सीटों पर जीत हासिल नहीं कर सकता. इस बार भी बीजेपी की जीत में मुस्लिम वोटर्स का योगदान बढ़-चढ़कर रहा.

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