Rahul Gandhi British Citizenship Case: लखनऊ. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है. लखनऊ की अदालत ने उनकी कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
कोर्ट ने साफ कहा कि इस याचिका पर सुनवाई करना समय की बर्बादी है. एसीजेएम आलोक वर्मा ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना अदालत का काम नहीं है. यह केंद्र सरकार का विषय है.
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कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका बिना किसी ठोस सबूत के दायर की गई थी. इसका मकसद सिर्फ परेशान करना और कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करना था. इसलिए इसे कानून का दुरुपयोग माना गया.
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बीजेपी नेता और याचिकाकर्ता विग्नेश ने दावा किया था कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है. उन्होंने मांग की थी कि इसी आधार पर राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो.
आठ दिन तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने से भी इनकार कर दिया.
याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923, पासपोर्ट अधिनियम 1967 और विदेशी अधिनियम 1946 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी. उनका कहना था कि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता.
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याचिका में यह भी कहा गया था कि राहुल गांधी ने ब्रिटिश अधिकारियों के सामने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था. संविधान के अनुसार, अगर कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाती है.
इस मामले से जुड़े कागजात पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और इलाहाबाद हाई कोर्ट में पेश किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की शुरुआती सुनवाई रायबरेली की विशेष एमपी एमएलए कोर्ट में शुरू हुई थी.
हाल ही में याचिकाकर्ता विग्नेश ने केस को लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी. उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा था कि रायबरेली में उन्हें खतरा महसूस हो रहा है. इसके बाद लखनऊ में मामले की सुनवाई हुई और अब कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.



















