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रायपुर नगर निगम को मिलेगा बड़ा राजस्व: अडानी ग्रुप से हर महीने एक करोड़ रुपये की कमाई संभावित

रायपुर। रायपुर नगर निगम ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शहर के निमोरा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से ट्रीटेड पानी की बिक्री से निगम को हर महीने करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। अडानी ग्रुप की कंपनी ने तिल्दा स्थित अपने संयंत्र के लिए 800 करोड़ रुपये का डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किया है, जिसके तहत प्रतिदिन 68 लाख लीटर ट्रीटेड पानी की आपूर्ति की योजना है।

महापौर मीनल चौबे ने बताया कि निगम पहले से ही एपीआई इस्पात को निमोरा एसटीपी से प्रतिदिन 5 लाख लीटर ट्रीटेड पानी बेच रहा है, जिससे इस महीने 8 लाख 34 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। निकट भविष्य में अडानी ग्रुप के साथ सौदा पूरा होने पर मासिक आय एक करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। निमोरा एसटीपी की कुल क्षमता 98 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जबकि शहर के तीन प्रमुख एसटीपी-निमोरा, कारा और चंदनीडीह-में कुल 18 नालों का गंदा पानी ट्रीट किया जा रहा है।

यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देगाः आयुक्त

निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा कि यह पहल सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के साथ जल संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी पूरा करेगी। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर अंडरग्राउंड वाटर के उपयोग को रोकने के लिए उद्योगों को ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएसआईडीसी से भी प्रतिदिन 7 लाख लीटर पानी की मांग आई है, जो उरला इंडस्ट्रीज एरिया के छोटे कारखानों की जरूरतें पूरी करेगी।

अडानी ग्रुप की कंपनी तिल्दा में स्थित है, जो निमोरा से लगभग 48 किमी दूर है। यहां पानी पहुंचाने के लिए सक्शन पाइपलाइन और स्टोरेज सम्पवेल का निर्माण होगा। एपीआई इस्पात ने पहले ही 25 किमी पाइपलाइन बिछाकर जनवरी से पानी लेना शुरू कर दिया है।

इसके अलावा, भिलाई स्थित एनएचपीसीएल इस्पात ने चंदनीडीह प्लांट से पानी लेने के लिए 250 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया है, जहां से 48 एमएलडी ट्रीटेड पानी बेचा जाएगा। अडानी ग्रुप को उच्च गुणवत्ता वाला टर्सरी ट्रीटमेंट पानी चाहिए, जिसके लिए मेयर इन काउंसिल ने प्रस्ताव पारित कर दिया है और जल्द काम शुरू होगा।

स्वच्छ भारत मिशन के नोडल अधिकारी योगेश कडू ने बताया कि शहर के बड़े बिल्डर्स की कंस्ट्रक्शन साइट्स पर भी ट्रीटेड पानी टैंकर से उपलब्ध कराने की चर्चा चल रही है, ताकि भूजल दोहन कम हो। भाठागांव एसटीपी का पानी गार्डन सिंचाई और डिवाइडर्स पर लगे पौधों के लिए उपयोग किया जाएगा। यह मॉडल अन्य उद्योगों के साथ विस्तारित किया जाएगा, जिससे न केवल निगम की आय बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निपटने में भी मदद मिलेगी। एनजीटी की चेतावनी के बाद केंद्र की मदद से तीनों एसटीपी में ट्रीटमेंट कार्य तेज किया गया है, जिससे खारुन नदी में गंदा पानी गिरना रुकेगा।

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