एकादशी के व्रत का हिंदू धर्म में बहुत महत्व होता है। मान्यता के अनुसार एकादशी के दौरान भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करने से जिंदगी से सारी बाधाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। बता दें कि एकादशी हर महीने में दो बार आती हैं। महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में बारी-बारी से आने वाली हर एक एकादशी का अलग नाम होता है और इनके मायने भी अलग-अलग होते हैं। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। इस विशेष एकादशी में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण जी की पूजा होती है। विशेष रूप से काशी में रंगभरी एकादशी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। नीचे विस्तार से जानें कि ऐसा क्यों होता है और रंगभरी एकादशी के दौरान काशी में शिवजी कब होली खेलेंगे?
इस के लिए शुभ मुहूर्त
बता दें कि रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जा रही है। अगर पूजा की बात की जाए तो हिंदू पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में 5 बजकर 9 मिनट से लेकर 5 बजकर 59 मिनट के बीच पूजा की जा सकती हैं। वहीं पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त को कहा जाता है। रंगभरी एकादशी के अभिजीत मुहूर्त की शुरुआत दोपहर में 12 बजकर 11 मिनट से लेकर 12 बजकर 57 मिनट तक रहने वाला है। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है और इसके मुहूर्त में भी रंगभरी एकादशी की पूजा की जा सकती है। इस योग की शुरुआत सुबह 10 बजकर 48 मिनट से रात तक रहने वाली है। जो लोग रंगभरी एकादशी पर व्रत रखेंगे वो अगले दिन यानी 28 फरवरी की सुबह 6 बजकर 47 मिनट से लेकर 9 बजकर 6 मिनट के बीच पारण कर सकते हैं।
शुरू हुई ये नई परंपरा
बता दें कि रंगभरी एकदशी के दौरान बीते साल ही एक नई परंपरा शुरू हुई है कि ब्रज क्षेत्र से भगवान शिव के लिए उपहार के तौर पर भस्म लाई गई। वहीं महादेव की नगरी से बाल गोपाल के लिए खिलौने और वस्त्र इत्यादि भिजवाया गया। माना जा रहा है कि इसे परंपरा के तौर पर अब आगे भी बढ़ाया जाएगा।
काशी में रंगभरी एकादशी
काशी में रंगभरी एकादशी मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जिसका संबंध भगवान शिवजी से ही है। मान्यता के हिसाब से विवाह के बाद भगवान शिवजी मां पार्वती का गौना करवाकर उन्हें काशी ले आए थे। इस दौरान समस्त देवी-देवतागणों ने काशी में रंग और फूलों की वर्षा से उनका स्वागत किया था। बस तभी से ये परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि देवी-देवताओं के साथ होली खेलने के अगले दिन भगवान शिव ने श्मशान में भूत-प्रेतों और पिशाचों के साथ भस्म वाली होली खेली थी और इसे ही अब काशी में मसान होली के नाम से जाना जाता है।
रंगभरी एकादशी पर करें ये उपाय
अगर आपको करियर में बार-बार बाधा आ रही है तो रंगभरी एकादशी पर एक खास उपाय कर सकते हैं। इस खास दिन पर आंवले के पेड़ को जड़ चढ़ाएं। इसके बाद जड़ से मिट्टी लेकर उसका तिलक अपने माथे पर लगाएं। इस एक आसान से उपाय से आपकी जिंदगी में आने वाली वो सारी बाधाएंं खत्म हो जाएंगी जिसकी वजह से आप करियर में ग्रोथ नहीं देख पा रहे हैं।



















