रायपुर | छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल में प्रशासनिक रिक्तता का खामियाजा प्रदेश के हजारों युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। पिछले तीन महीनों से काउंसिल में रजिस्ट्रार का पद खाली होने के कारण करीब 1,000 फार्मासिस्टों का पंजीयन और नवीनीकरण (रिन्यूअल) अधर में लटका हुआ है। इनमें 600 से अधिक नए आवेदन और लगभग 400 नवीनीकरण के मामले शामिल हैं। स्थिति यह है कि रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर न होने के कारण न तो नए लाइसेंस जारी हो पा रहे हैं और न ही पुराने दस्तावेजों का सत्यापन हो पा रहा है।
सरकारी नौकरी और ड्रग लाइसेंस पर संकट
पंजीयन प्रक्रिया बाधित होने से फार्मासिस्टों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। डीबी स्टार की पड़ताल के अनुसार, इस देरी की वजह से दर्जनों महत्वपूर्ण कार्य रुके हुए हैं:
• दस्तावेज सत्यापन: कई अभ्यर्थियों का चयन सरकारी नौकरियों में हुआ है, लेकिन पंजीयन प्रमाण पत्र न होने के कारण वे इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से बाहर होने की कगार पर हैं।
• ड्रग लाइसेंस रिन्यूअल: मेडिकल स्टोर संचालित करने के लिए ड्रग लाइसेंस का नवीनीकरण अनिवार्य है, जिसके लिए फार्मासिस्ट पंजीयन दिखाना पड़ता है। इसके अभाव में कई स्टोर्स के लाइसेंस एक्सपायर हो रहे हैं।
• प्राइवेट सेक्टर में दिक्कत: निजी अस्पतालों और कंपनियों में कार्यरत फार्मासिस्ट अपने अप्रेजल (वेतन वृद्धि) के लिए नवीनीकरण दस्तावेज जमा नहीं कर पा रहे हैं।
कोर्ट के निर्देश के बाद भी खाली है पद
काउंसिल में वर्तमान में 35,000 से अधिक फार्मासिस्ट पंजीकृत हैं। जानकारी के अनुसार, पूर्व में हुई रजिस्ट्रार की नियुक्ति को माननीय न्यायालय ने गलत ठहराया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद शासन ने अब तक नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति नहीं की है। हालांकि, कुछ लंबित मामले उस समय के भी हैं जब रजिस्ट्रार पदस्थ थे, लेकिन वर्तमान में पूरी प्रक्रिया ठप है। काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया शासन स्तर पर विचाराधीन है और जल्द ही पद भरने के प्रयास किए जा रहे हैं।
केस स्टडी: छात्रों और पेशेवरों की जुबानी
1. केस 1 (नौकरी का संकट): एक अभ्यर्थी (परिवर्तित नाम- कैसार केशव) का चयन सेंट्रल ड्रग इंस्पेक्टर के पद पर हुआ है। अप्रैल में उनका इंटरव्यू है, लेकिन काउंसिल से पंजीयन न मिलने के कारण उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिरने का डर है।
2. केस 2 (जगदलपुर): दीपक पाण्डेय ने जनवरी में नवीनीकरण का आवेदन दिया था। मार्च बीतने को है, लेकिन रिन्यूअल न होने से उनका ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण भी अटक गया है।
3. केस 3 (कोंडागांव): जितेन्द्र कुमार साहू ने 29 दिसंबर को आवेदन किया था। उनके लाइसेंस की एक्सपायरी डेट नजदीक आ गई है, जिससे उनके व्यवसाय पर संकट मंडरा रहा है।
गड़बड़ियों की आशंका: मृत सदस्यों के नाम पर चल रहे स्टोर
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (IPA) के सचिव राहुल वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काउंसिल में लंबे समय से व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। शिकायतों के अनुसार:
• कई मेडिकल स्टोर मृत सदस्यों के पंजीयन पर संचालित हो रहे हैं।
• एक ही फार्मासिस्ट के पंजीयन का उपयोग कई अलग–अलग स्थानों पर किया जा रहा है।
• फार्मेसी की डिग्रियों को ‘लीज‘ पर देकर अवैध रूप से दुकानें चलाई जा रही हैं।
वर्मा का दावा है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच हो, तो बड़े स्तर पर धांधली सामने आ सकती है।
काउंसिल की सफाई और वैकल्पिक प्रयास
काउंसिल के पास फिलहाल मृत फार्मासिस्टों का कोई सटीक डेटा नहीं है। इस विसंगति को दूर करने के लिए काउंसिल ने छत्तीसगढ़ जन्म-मृत्यु पंजीयक को पत्र लिखकर मृतकों का आंकड़ा मांगा है ताकि डेटाबेस को अपडेट किया जा सके।
इसके साथ ही, रजिस्ट्रार न होने की आपात स्थिति को देखते हुए काउंसिल ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को भी पत्र लिखा है। इसमें अनुरोध किया गया है कि जिन फार्मासिस्टों का ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण पंजीयन की कमी के कारण अटका है, उन्हें फिलहाल राहत दी जाए, क्योंकि नियमानुसार ड्रग लाइसेंस के लिए 6 महीने पहले आवेदन करना होता है।
“हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति जल्द से जल्द हो ताकि आवेदकों का काम न रुके। साथ ही, व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए जन्म-मृत्यु पंजीयक से जानकारी मांगी गई है।”
अरुण मिश्रा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल



















