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पुरानी कार को कहें ‘बाय-बाय’ नहीं, बनाएं EV: जानें कैसे पेट्रोल-डीजल गाड़ी को इलेक्ट्रिक में बदलें, खर्च और नियम

नई दिल्ली: बढ़ते प्रदूषण और आसमान छूती ईंधन की कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। ऐसे में लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, नई ईवी खरीदना हर किसी के बजट में नहीं होता। इसी समस्या का समाधान बनकर उभरा है ‘EV कन्वर्जन, जहां आप अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल कार या बाइक को इलेक्ट्रिक में बदल सकते हैं।

क्या है EV कन्वर्जन किट?

यह एक प्रकार की ‘मैकेनिकल सर्जरी’ है। इस किट के जरिए गाड़ी से इंजन, फ्यूल टैंक और एग्जॉस्ट सिस्टम निकालकर उसकी जगह बैटरी, मोटर, चार्जर और वायरिंग लगा दी जाती है। भारत में Loop Moto, E-Trio, और Bharat Kit जैसी कंपनियां कारों के लिए, जबकि GoGoA1 और Green Tiger जैसे ब्रांड टू-व्हीलर्स के लिए यह समाधान दे रहे हैं।

कन्वर्जन की प्रक्रिया: सावधानी है जरूरी

  1. कंडीशन चेक: हर गाड़ी कन्वर्जन के लिए फिट नहीं होती। यदि गाड़ी की बॉडी कमजोर है या सस्पेंशन खराब है, तो भारी बैटरी का वजन खतरा पैदा कर सकता है।
  2. पार्ट्स रिमूवल: इंजन और रेडिएटर जैसे पुराने हिस्सों को हटाया जाता है।
  3. इंस्टॉलेशन: मोटर और बैटरी को फिक्स कर वायरिंग की जाती है।
  4. लीगल अप्रूवल: सबसे अहम स्टेप RTO इंस्पेक्शन है। कन्वर्जन के बाद RC पर फ्यूल टाइप बदलवाना अनिवार्य है, वरना गाड़ी सड़क पर चलाना अवैध माना जाएगा।

कितना आएगा खर्च?

  • कार: एक सामान्य कार को इलेक्ट्रिक बनाने में 4 से 6 लाख रुपये का खर्च आता है। बड़े वाहनों के लिए यह बजट 8-9 लाख तक जा सकता है।
  • टू-व्हीलर: बाइक या स्कूटर के लिए यह खर्च 30,000 से 90,000 रुपये के बीच रहता है।

क्या हैं नियम और सुरक्षा मानक?

भारत सरकार ने EV कन्वर्जन को वैध बनाया है, लेकिन इसके लिए कड़े नियम हैं:

  • किट का ARAI या ICAT से अप्रूव होना अनिवार्य है।
  • बैटरी सुरक्षा के लिए AIS 156 जैसे मानकों का पालन जरूरी है ताकि आग लगने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

फायदे और चुनौतियां

फायदे:

  • लो रनिंग कॉस्ट: पेट्रोल के मुकाबले प्रति किलोमीटर का खर्च बेहद कम हो जाता है।
  • पुरानी गाड़ी को नया जीवन: जिन शहरों में 10-15 साल पुराने वाहनों पर बैन है, वहां कन्वर्जन से गाड़ी की लाइफ बढ़ाई जा सकती है।
  • पर्यावरण अनुकूल: जीरो टेलपाइप एमिशन।

चुनौतियां:

  • सेफ्टी रिस्क: गलत फिटिंग से शॉर्ट सर्किट या आग का खतरा रहता है।
  • सर्विस नेटवर्क: नई होने के कारण अभी इन कंपनियों का सर्विस नेटवर्क काफी सीमित है।

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