गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि पिछले एक साल में राज्य के लिए करीब 55,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय परियोजनाओं को मंजूर दी गई है। शर्मा ने कहा कि सरकार ने कामाख्या रेलवे स्टेशन से कामाख्या मंदिर तक कामाख्या रोपवे परियोजना के लिए निविदा पहले ही जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि जल्द इसकी नींव रखी जाएगी।यहां लोकसेवा भवन में संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च में असम के अपने दौरे के दौरान महत्वाकांक्षी सिलचर-शिलांग-गुवाहाटी हाई-स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 22,864 करोड़ रुपये है, जो केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए किए गए सबसे बड़े हाईवे ढांचागत विकास के आवंटन में से एक है। कॉरिडोर से गुवाहाटी और सिलचर के बीच यात्रा का समय लगभग 4.5 से 5 घंटे कम होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने इसे एक ‘गेम-चेंजिंग’ पहल बताया जो असम और मेघालय में कनेक्टिविटी को काफी बदल देगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने असम के लिए अन्य कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके अलावा असम सरकार की ओर से ढांचागत विकास संबंधी अन्य कई परियोजनाओं के प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखे गए हैं।

कामाख्या रोपवे परियोजना की सारी बाधाएं जल्द हटेंगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र द्वारा पहले ही मंजूरीकृत 600 करोड़ रुपए की लागत वाली कामाख्या रोपवे परियोजना की टेंडरिंग का काम हो चुका है तथा अगले दस दिनों बाद निर्माण कंपनी का नाम तय हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत कामाख्या रेलवे स्टेशन से सीधे मां कामाख्या मंदिर तक रोपवे से भक्त जा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना से कामाख्या मंदिर परिसर के ‘इको-सिस्टम’ के लिए चुनौती की संभावना जताए जाने पर गौहाटी उच्च न्यायालय ने परियोजना पर रोक लगा दी थी। आईआईटी, गुवाहाटी (आईआईटीजी) और रूरकी स्थित राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजिकल संस्थान की रिपोर्ट के बाद परियोजना पर छाए काले बादल हट गए हैं। दो साल के अध्ययन के बाद आईआईटीजी ने कहा कि परियोजना का कामाख्या मंदिर के ‘इको-सिस्टम’ के साथ कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि अब यह परियोजना को लागू करने में गौहाटी उच्च न्यायालय की हरी झंडी का इंतजार है।
80 हजार करोड़ की योजनाओं का भरोसा मिला केंद्र से
शर्मा ने असम में मंजूर और नियोजित कई परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल दूसरे ‘एडवांटेज असम इन्वेस्टमेंट समिट’ के दौरान केंद्र ने 80,000 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भरोसा दिया था, और राज्य को पहले ही 55,000 करोड़ रुपये की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए मंजूरी मिल चुकी है।’’
गुवाहाटी हवाईअड्डे से लेकर जलुकवाड़ी तक एलिवेटेड गलियारा
शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार एक-दो दिन में गुवाहाटी में बोरझार स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बरदलै अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हवाई अड्डे से राज्य की राजधानी के प्रवेश बिंदु जलुकबाड़ी तक एक एलिवेटेड गलियारा बनाने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकती है। इस सड़क से शहर के अंदर ट्रैफिक कम होगा और एयरपोर्ट तक पहुंच तेज व आसान होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का अगले 22 फरवरी को गुवाहाटी एयरपोर्ट में शुभारंभ किया जाएगा।
बाईहाटा चारिआली से तेजपुर तक बनेगी फोरलेन सड़क
सीएम हिमंत ने बताया, ‘‘बाईहाटा चारिआली से तेजपुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग को चार लेन का बनाने की 14,000 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूरी के आखिरी चरण में है।’’ उन्होंने उम्मीद जताई कि एक या दो महीने में इस परियोजना को भी केंद्र की मंजूरी मिल जाएगी। सीएम ने कहा इससे मिडिल असम में एक महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि ब्रह्मपुत्र के नीचे नुमालीगढ़ टनल दुनिया की दूसरी अंडरवाटर टनल होगी, जो रेल आवागमन को आसान बनाने में सक्षम होगी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स के लिए गेम-चेंजर बताया। इससे उत्तरी और ऊपरी असम के बीच यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा, साथ ही पूरे इलाके में रक्षा और माल ढुलाई भी मजबूत होगी।
डिब्रुगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए 600 करोड़
सीएम हिमंत ने जानकारी दी कि डिब्रुगढ़ मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के लिए 600 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं, ताकि सुविधाओं को अपग्रेड किया जा सके और एडवांस्ड इलाज सेवाओं को बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स का स्केल केंद्र के मजबूत समर्थन के साथ असम के तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास को दिखाता है, जिससे राज्य पूर्वोत्तर के लिए एक अहम कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स हब बन गया है।



















