रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की परीक्षाओं में लापरवाही की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष रेणु जी. पिल्ले ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि परीक्षा ड्यूटी से इंकार करने वाले शासकीय शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, हाल के निरीक्षणों में सामने आया कि कई परीक्षा केंद्रों में पर्यवेक्षक और वीक्षक के रूप में सरकारी शिक्षकों की जगह अतिथि व्याख्याताओं और निजी संस्थानों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसे परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही माना गया है।
व्यापमं द्वारा आयोजित पीईटी, पीपीएचटी, नर्सिंग सहित विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं का कैलेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है और हर दूसरे-तीसरे सप्ताह परीक्षाएं आयोजित हो रही हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।
अध्यक्ष ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि पर्यवेक्षक के रूप में केवल शासकीय महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापक/व्याख्याता या उससे उच्च स्तर के अधिकारी ही नियुक्त किए जाएं। किसी भी स्थिति में अतिथि व्याख्याता या निजी संस्थानों के शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाए। वहीं, वीक्षक के रूप में भी अशासकीय संस्थानों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने पर रोक लगा दी गई है।
ड्यूटी से इंकार करना माना जाएगा अवचार
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा कार्य से इंकार करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत अवचार की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार, कई केंद्रों पर सरकारी शिक्षक ड्यूटी से बचने के कारण वैकल्पिक रूप से निजी शिक्षकों को लगाना पड़ रहा था।
परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने कड़े नियम लागू
परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभ्यर्थियों के लिए भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब परीक्षार्थियों को केवल हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े पहनकर ही प्रवेश मिलेगा। फुल स्लीव कपड़े और गहरे रंग जैसे काला, गहरा नीला, हरा, मैरून आदि प्रतिबंधित रहेंगे।
इसके अलावा जूते, बेल्ट, पर्स और कान के आभूषण पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।



















