छत्तीसगढ़ के बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने अब तक का सबसे बड़ा एंटी-नक्सल ऑपरेशन चलाया है. मंगलवार सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई में 42 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है, जिनमें से 34 शव पुलिस ने बरामद किए हैं. सूत्रों के अनुसार, कुख्यात नक्सली नेता हिड़मा और देवा मौके से फरार होने में कामयाब रहे.
*30 घंटे से जारी है मुठभेड़*
यह ऑपरेशन उसूर थाना क्षेत्र के कर्रेगट्टा, नडपल्ली, और पुजारी कांकेर की पहाड़ियों पर 30 घंटे से अधिक समय से चल रहा है. माओवादी संगठन की बटालियन नंबर-1 को घेरने के लिए छत्तीसगढ़, तेलंगाना, और महाराष्ट्र के करीब 5,000 जवानों ने मोर्चा संभाला है. मुठभेड़ में दोनों ओर से लगातार गोलीबारी जारी है. सीआरपीएफ, डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा, तेलंगाना की ग्रे हाउंड, और महाराष्ट्र की C-60 इकाइयों के जवान इस अभियान में शामिल हैं.
*100 से अधिक आईईडी बरामद*
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से 100 से अधिक आईईडी बरामद किए हैं, जिन्हें नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाने के लिए बिछाया था. पहाड़ी इलाकों में डी-माइनिंग का काम जारी है, और ड्रोन व सैटेलाइट के जरिए कर्रेगुट्टा पहाड़ पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
*दो जवान घायल, रायपुर रेफर*
नक्सलियों के हमले में दो जवान घायल हुए हैं, जिन्हें हेलीकॉप्टर से रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जवानों के लिए मुठभेड़ स्थल पर हेलीकॉप्टर से पानी और खाना भेजा गया है, साथ ही बीजापुर से अतिरिक्त बैकअप फोर्स भी रवाना की गई है.
*नक्सलियों का बड़ा कैडर घेराबंदी में*
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों को इस इलाके में माओवादियों के बड़े कैडर की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी. माओवादियों के सबसे मजबूत सैन्य संगठन बटालियन नंबर एक के वरिष्ठ कैडरों और माओवादियों की तेलंगाना राज्य समिति की मौजूदगी के बारे में मिली सूचना के आधार पर सोमवार को अभियान शुरू किया गया था. यह अभियान लगातार कुछ दिनों तक चलेगा. अधिकारियों ने बताया कि घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा यह इलाका माओवादियों की बटालियन नंबर एक का आधार क्षेत्र बताया जाता है.



















