Assam Moh Juj News: गुवाहाटी: असम की पारंपरिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही भैंसों की लड़ाई यानी ‘मोह जुझ’ (Moh Juj) अगले साल से फिर अपने पुराने रंग में नजर आ सकती है। राज्य के जल संसाधन मंत्री पीयूष हजारिका ने गुरुवार को संकेत दिए हैं कि कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होते ही अगले साल से सरकार इसे आधिकारिक तौर पर आयोजित करेगी। (Buffalo fight Assam)

राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
मंत्री हजारिका ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि इस वर्ष माघ बिहू (Magh Bihu) के दौरान आधिकारिक आयोजन न होने का मुख्य कारण ‘कानूनी अनिश्चितता’ है। उन्होंने कहा, “असम विधानसभा ने इससे संबंधित विधेयक (Amendment Bill) पारित कर दिया है, लेकिन अभी इस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति मिलना बाकी है।”
हजारिका ने आगे कहा, “बिना राष्ट्रपति की मंजूरी के स्थिति ’50-50′ वाली है, इसलिए हम कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। जैसे ही मंजूरी मिल जाएगी, अगले साल पूरे राज्य में भव्य तरीके से इसका आयोजन किया जाएगा।” (Buffalo fight Assam)
जलीकट्टू की तर्ज पर कानूनी बदलाव
असम सरकार ने पिछले साल 27 नवंबर को विधानसभा में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में संशोधन के लिए एक विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कदम की तुलना तमिलनाडु के ‘जलीकट्टू’ से की जा रही है।
पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री कृष्णेंदु पाल ने पहले ही इसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत बताते हुए कहा था कि इससे स्वदेशी भैंसों की नस्लों को बढ़ावा मिलता है।
क्यों लगा था प्रतिबंध?
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए भैंसों और बुलबुल पक्षियों की लड़ाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार ने इसे कानूनी रूप से सुरक्षित करने के लिए संशोधन विधेयक का रास्ता चुना है। (Jallikattu vs Moh Juj)



















