UGC New Rule: यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इन नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर कल सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी. इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच करेगी.
वकील विनीत जिंदल ने यह याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव करते हैं. इससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है. इसलिए इन नियमों पर रोक लगाई जानी चाहिए.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि UGC रेगुलेशन 2026 के नियम 3(c) को लागू करने पर रोक लगाई जाए. याचिकाकर्ता का कहना है कि 2026 के नियम सभी जातियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए. फिलहाल यूजीसी का यह नया नियम सरकार के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है.

UGC के नए नियमों का देशभर में विरोध
सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के लोगों में इन नियमों को लेकर काफी नाराजगी है. यह विरोध अब धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है. छात्र और कई संगठन खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं. हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा. इसके बावजूद लोगों में असंतोष बना हुआ है.
बताया जा रहा है कि यूजीसी के इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अब तक करीब 20 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. इनमें से वकील विनीत जिंदल की याचिका पर कल सुनवाई होनी है.
इन बातों पर जताया जा रहा है विरोध
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यूनिवर्सिटी में बनने वाली इक्विटी कमेटी में SC, ST और OBC का प्रतिनिधित्व तो रखा गया है, लेकिन सामान्य वर्ग के लिए कोई जगह नहीं है. नियमों में SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव से सुरक्षा की बात की गई है, लेकिन सामान्य वर्ग के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकने का कोई साफ प्रावधान नहीं है.
झूठी शिकायत करने वालों के लिए सजा का कोई नियम नहीं है, जिससे नियमों के दुरुपयोग का डर है.
लोगों का यह भी कहना है कि सामान्य बातचीत या पढ़ाई से जुड़ी बहस को भी भेदभाव बताकर शिकायत की जा सकती है, इसे रोकने का कोई तरीका तय नहीं किया गया है. इसके अलावा छात्रों के जाति के आधार पर बंटने की आशंका भी जताई जा रही है.
13 जनवरी को जारी हुए थे नए नियम
‘यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाने से जुड़े नियम 2026 जारी किए थे. ये नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे. इसके तहत सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया है.’



















