जमशेदपुर। खाड़ी देशों (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध और बारूद की गंध के बीच जमशेदपुर के पारडीह (आशियाना वुडलैंड) निवासी अंश त्रिपाठी ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ को सुरक्षित भारत पहुँचाकर अंश ने न केवल अपनी तकनीकी कुशलता साबित की, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे खतरनाक रास्ते से गुजरना था ‘मिशन’
इंडियन ऑयल के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब से 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से गुजरना पड़ा, जहाँ युद्ध की विभीषिका चरम पर है। कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व वाली 27 सदस्यीय टीम में अंश त्रिपाठी सेकंड इंजीनियर के तौर पर तैनात थे, जिन पर जहाज के पूरे तकनीकी संचालन की कमान थी।
7 दिन तक परिवार की थमी रहीं धड़कनें
सफर के दौरान जब एक हफ्ते तक अंश का परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया, तो घर में कोहराम मच गया था। पारडीह स्थित उनके आवास पर माता-पिता और पत्नी अनहोनी की आशंका से डरे हुए थे।
- पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी (यूसीआइएल के सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक) और माता चंदा त्रिपाठी लगातार प्रार्थना कर रहे थे।
- पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी (टाटा स्टील में सीए) ने बताया कि जहाज के गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित लंगर डालने की खबर के बाद ही परिवार ने चैन की सांस ली है।
शिक्षा और करियर का सफर
अंश त्रिपाठी बचपन से ही मेधावी रहे हैं:
- स्कूली शिक्षा: मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा (जादूगोड़ा)।
- उच्च शिक्षा: 2012 में BIT मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड से मरीन इंजीनियरिंग।
- अनुभव: दिसंबर 2014 से शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में निरंतर सेवाएं दे रहे हैं।




















