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चेतावनी! होर्मुज बंद होने से सिर्फ पेट्रोल-डीजल महंगा नहीं होगा! ठप हो जाएगी भारत की ‘जीवन रेखा’

Hormuz Impact India: ईरान-अमेरिका तनाव से भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसका प्रभाव कच्चे तेल, LPG और LNG तक ही सीमित नहीं रहने वाली है. घर के बजट तक पहुंचेगी युद्ध की तपिश.


Iran US conflict:
 अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंध का असर भारत के लिए सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा. यह पूरा मामला कई स्तरों पर भारत के लिए दबाव बनाने वाला है. खासकर ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं. आइए जानते हैं, अमेरिका-ईरान के बीच बिगड़ते हालात का भारत पर क्या असर पड़ने वाला हैं?

भारत के लिए कई मोर्चों पर चिंता

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से एलएनजी की सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है. एलपीजी आयात पर होने वाले असर और शिपिंग खर्च में लगातार बढ़ोतरी चिंता बढ़ाने का काम कर रही है.

देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है. मुख्य चिंता की बात करें तो, बढ़ती लागत और कम होती सप्लाई का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. घरेलू ईंधन सप्लाई और रुपये पर दबाव बनने की संभावना है. 

भारत के लिए क्यों अहम है यह रास्ता

1. भारत की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता काफी ज्यादा है. खासकर कच्चे तेल के आयात पर, क्योंकि देश का लगभग आधा क्रूड इसी रास्ते से होकर आता है. तनाव वाले माहौल की वजह से फ्रेट और इंश्योरेंस लागत बढ़ जाती है. डिलीवरी में भी देरी होती है.

यानी कि कुल मिलाकर कच्चे तेल की landed cost में इजाफा आता है. जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है. 

2. देश अपनी एलपीजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस रास्ते पर बहुत अधिक निर्भर है. भारत करीब 60 प्रतिशत मांग आयात से पूरी करता है और इन आयातों का लगभग 90 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से गुजरता है.

ऐसे में किसी भी तरह के तनाव से सीधे घरेलू रसोई तक असर पहुंच सकता है. एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की आशंका है.

3. इसका असर सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहने वाला है. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ना, खेती-बाड़ी और खाद से जुड़े सेक्टर, केमिकल व मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के साथ-साथ FMCG उत्पादों की कीमतों तक में तेजी आ सकती है. इस दबाव का असर बाजार से होते हुए सीधे आम लोगों के घरेलू बजट तक पहुंचने वाला है.

अमेरिका-ईरान के बीच बिगड़ते हालात

अमेरिका की ओर से ईरान से जुड़े समुद्री मार्गों पर ब्लॉकेड लागू कर दिया गया है. जिसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत टूटने की स्थिति बन गई है. इस कदम का सीधा असर ईरान के बंदरगाहों से जुड़े जहाजों पर पड़ेगा. हालांकि ईरान के अलावा दूसरे जगह जाने वाले जहाजों को आवाजाही की अनुमति दी गई है. दोनों देशों के बीच यह तनाव ऐसे समय में जारी है जब वैश्विक बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा हैं. 

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