छत्तीसगढ़ के बीजापुर से नक्सलवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में मंगलवार को ऐतिहासिक घटनाक्रम हुआ। 25 लाख का इनामी और खूंखार नक्सली कमांडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया। यह सरेंडर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की डेडलाइन से ठीक 7 दिन पहले हुआ है। अमित शाह के नक्सलियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी थी कि नक्सली 31 मार्च 2026 तक आत्मसमर्पण कर लें, वरना ऑपरेशन के तहत उन्हें खत्म कर दिया जाएगा। पापा राव बस्तर का आखिरी नक्सल कमांडर था।
वरिष्ठ माओवादी कमांडर पापाराव उर्फ मंगू ने सरेंडर के दौरान कहा, “मैं डरा नहीं हूं, लेकिन अब संविधान के तहत लोगों के हक- जल, जंगल और जमीन के लिए लड़ूंगा। मैं हथियार छोड़ रहा हूं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहकर काम करूंगा।”
सरेंडर करने वालों में 7 महिलाएं
पापाराव दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य और माओवादियों के साउथ सब जोनल ब्यूरो का प्रभारी रहा है। उसके साथ आत्मसमर्पण करने वाले 18 नक्सलियों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर प्रकाश मडवी और अनिल टट्टी जैसे अहम कैडर भी शामिल हैं। सभी ने पुलिस के सामने AK-47 समेत कई आधुनिक हथियार भी सौंपे।
25 लाख का इनामी
करीब 25 साल तक सक्रिय रहे पापाराव इंद्रावती-अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सली गतिविधियों का बड़ा चेहरा था। वह 2010 के ताड़मेटला हमले का मास्टरमाइंड भी माना जाता है, जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे। उस पर सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि इस सरेंडर के बाद राज्य में इस स्तर का कोई बड़ा नक्सली कमांडर सक्रिय नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य अब करीब दिख रहा है।
नक्सलवाद जल्द खत्म होगा
बस्तर रेंज के आईजीपी सुंदरराज पी ने इसे सरकार की लंबे समय से चल रही रणनीति की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में “निर्णायक ब्रेकथ्रू” है। पहली बार दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन लगभग लीडरलेस हो गया है, जो आने वाले समय में पूरी तरह खत्म होने की ओर इशारा करता है।
2014 से अब तक 10 हजार नक्सलियों का आत्मसमर्पण
अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक में सुरक्षा बलों के दबाव, खुफिया ऑपरेशन, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और बेहतर पुनर्वास नीति के चलते नक्सलियों का मनोबल तेजी से गिरा है। 2014 से अब तक देशभर में 10 हजार से ज्यादा नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें 2025 में 2300 और 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 630 से अधिक कैडर शामिल हैं।



















