मकर संक्रांति यानी स्नान और दान का पर्व है। इस पर्व में पुण्यकाल में किया गया स्नान और दान बहुत खास माना जाता है। इसका बहुत फल मिलता है। मकर संक्रांति सूर्य की उपासना का पर्व है। इस बार मकर संक्रांति की तिथि को लेकर फिर कंफ्यूजन की स्थिति बन रही है। इस बार मकर संक्रांति पर कंफ्यूजन सूर्य के मकर राशि में जाने को लेकर है। दरअसल मकर संक्रांति मनाने के लेकर ज्योतिषाचार्य के अपने-अपने मत हैं। यहां हम आपको दोनों मत बता रहे हैं।
जानें कब मनेगी मकर संक्रांति
इस साल कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनेगी। क्योंकि इसी दिन सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे। इस दिन एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है।सुबह 7:15 बजे से रात 3:03 बजे तक मान्य होंगे। इस दिन मकर संक्रांति पर महा पुण्य काल दोपहर 3:07 बजे से शाम 6 बजे तक माना जाएगा। दूसरे जयोतिषियों का मत है कि मकर संक्रांति पर प्रदोष के बाद यदि रात्रि में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन होता है। इस प्रकार मकर संक्रांति खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा। स्नान दान के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
दान पुण्य के लिए शुभ समय
पीले वस्त्र पहने सूर्यदेव शेर पर सवार होकर दक्षिणायन से उत्तरायण होंगे। यह दिन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष माना जाता है। इस दिन सूर्य उपासना, गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान,दान या धार्मिक कार्यों का सौ गुना फल मिलता है। दान-पुण्य पूरे दिन किया जा सकेगा।धन, सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान और सूर्यदेव की पूजा के साथ कुछ उपाय लाभकारी माने जाते हैं। मान्यता है कि इससे सालभर धन-धान्य का भंडार भरा रहता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।



















