रायपुर। कहते हैं एक सफल पुरूष के पीछे महिला का हाथ होता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित टांक डेयरी का संचालन करने वाली श्रीमती पायल प्रफुल्ल टांक ने। पति के खेतों में गाय के गोबर के खाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू की डेयरी को आज उन्होंने अपनी मेहनत से प्रोफेशनल तरीके से करना शुरू किया हैं और आज उनके डेयरी में करीब छोटी बड़ी मिलाकर कुल 100 गाय हैं और वे 250 से अधिक घरों में शुद्ध दूध हाईजेनिक तरीके से पहुंचा रही हैं। उनकी इस डेयरी में दूध सप्लाई को छोड़कर सारा काम महिलाएं ही करती है। उनकी इस डेयरी से बकायदा दूध की बॉटलिंग होती है, जिससे रास्ते में मिलावट का खतरा न रहे और हाईजेनिक तरीके से घरों तक दूध पहुंच सके। ये बॉटलिंग 1 लीटर बोतल में ही यहां की जाती है।
सप्लाई के बाद बचे हुए दूध को वे खुद पनीर और घी तैयार करती है और इसमें वे किसी भी स्टॉफ की मदद नहीं लेती। वे कहती है शुरूआत के दिनों में बचे हुए दूध से पनीर औऱ घी बनाने की प्रक्रिया को लेकर काफी परेशान रहती थीं, क्योंकि पनीर और घी बनाने की पूरी प्रक्रिया उन्हें नहीं आती थी और कई बार ये खराब हो जाता था। लेकिन धीरे धीरे अपनी गलतियों से उन्होंने सीखा। वे कहती है कि इसमें उनकी सास भानू बेन टांक ने उनकी काफी मदद की।

कसाई घर जाने से बचाया गायों को
श्रीमती पायल टांक कहती है कि बात वर्षों पुरानी है। उनके पति पहले महासमुंद में सब्जी की खेती किया करते थे। इस दौरान एक वाक्या ऐसा हुआ कि कसाई घर जा रही गायों को गौ सेवकों ने पकड़ा। इसके बाद उनकी सेवा करने की जिम्मेदारी उनके परिवारों को दी गई। चूंकि डेयरी और खेती से जुड़ा काम करने का उनके परिजनों को अनुभव था,इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई और यही से गायों के प्रति सेवा करने की भावना भी जागी। वे कहती है कि उनके परिवार की ये चौथी पीढ़ी है जो खेती और डेयरी से जुड़ा काम कर रहे है। लेकिन इसके पहले तक उनके परिजनों ऐसे प्रोफेशनल तरीके से डेयरी का काम नहीं किया था।
कोरोनाकाल में कलेक्टर ने कहा था-सप्लाई नहीं करने देंगे दूध
कोरोनाकाल में लॉकडाउन के वक्त कलेक्टर के माध्यम से जोन कमिश्नर ने उन्हें फरमान दिया था कि वे घर-घर जाकर दूध की सप्लाई नहीं कर सकते है। इसके बाद उन्होंने इसका तरीका इजाद दिया। लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए उन्होंने दूध की बॉटलिंग शुरू की और इसे सील पैक कर घरों तक पहुंचाना शुरू किया। इसका फायदा ये हुआ कि दूध की शुद्धता भी बरकरार रहीं और वे कोरोनाकाल में लोगों के सीधे संपर्क में भी नहीं आए।
डेयरी का हर काम करती है महिलाएं
उनके इस डेयरी में सप्लाई छोड़कर सब काम महिलाएं करती है। बछड़ों के लिए फिडिंग कराना हो, या सफाई करना. खेत से चारा काटकर लाना हो या दूध की बॉटलिंग करना ये सभी काम महिलाएं ही करती है। हालांकि उनकी ये डेयरी ग्राम सेमरिया में है, लेकिन यहां से बॉटलिंग होने के बाद उनके घर तक पहले सप्लाई होता है और इसके बाद डिस्ट्रीब्यूशन का काम पूरा किया जाता है। उनका मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि जितने घरों तक दूध की सप्लाई होनी है उतनी बॉटल ही पैक कराई जाती है और बाकी बचे दूध का पनीर और घी बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
खेत में लगाते है 3-4 प्रकार के चारे
डेयरी संचालन करने वाली श्रीमती पायल टांक कहती है कि ग्राम सेमरिया स्थित उनकी इस डेयरी में ही हरे चारे उगाए जाते है। जिसमें अलग-अलग मौसम में गायों को उसे खिलाया जाता है। जिसमें गर्मी के मौसम में ज्वार और मक्का, बारिश के दिनों में यशवंत रजवांस और मक्का और ठंड के दिनों में बरसीम और नेपियर ग्रास खिलाया जाता है।
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