नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सोमवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। राज्यसभा चेयरमैन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इस घटनाक्रम के साथ ही राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की संख्या बल बढ़कर 113 हो गई है। यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सात ‘आप’ सांसदों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की थी। इस दौरान उन्होंने इस विलय को पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सदस्यों का भाजपा में विलय बताया था। इसी आधार पर उन्होंने राज्यसभा चेयरमैन को दस्तावेज सौंपकर विलय की अनुमति मांगी थी।
संविधान के प्रावधानों का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भारतीय संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि ‘आप’ के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भाजपा में विलय का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने विलय संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे राज्यसभा चेयरमैन के पास जमा कराया गया था। इन दस्तावेजों को जमा कराने की प्रक्रिया में उन्होंने स्वयं अन्य दो सांसदों के साथ सक्रिय भूमिका निभाई थी।
सोमवार को राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के साथ ही इस विलय पर संवैधानिक मुहर लग गई है, जिससे संसद के भीतर शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।




















