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IPO ने रातों-रात बदली किस्मत, SBI फंड्स के 13 कर्मचारी बने करोड़पति

देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI फंड्स मैनेजमेंट के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही कई कर्मचारियों की सालों की मेहनत का शानदार इनाम मिला है। कंपनी के आईपीओ (IPO) ने 13 कर्मचारियों को करोड़पति बना दिया है। इनमें सबसे बड़ा फायदा कंपनी के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर देविंदर पाल सिंह को हुआ, जिनके पास मौजूद शेयरों की कीमत करीब 121 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, कंपनी के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) श्रीनिवासन रामा अय्यर की हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 105 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह सब कंपनी के ESOP (Employee Stock Ownership Plan) की बदौलत संभव हुआ, जिसके तहत कर्मचारियों को पहले से ही कंपनी के शेयर खरीदने का मौका मिला था।

SBI फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ ₹574 प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर आया था। शेयर बाजार में इसकी शुरुआत शानदार रही और लिस्टिंग के दिन ही शेयर लगभग 7% प्रीमियम के साथ खुला। BSE पर शेयर ₹610 और NSE पर ₹613.30 पर लिस्टेड हुआ। इस शानदार लिस्टिंग से कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति में एक झटके में करोड़ों रुपये का इजाफा हो गया।

कंपनी के प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, देविंदर पाल सिंह के पास लगभग 21.14 लाख वेस्टेड शेयर हैं, जिनकी कीमत आईपीओ प्राइस के आधार पर करीब ₹121 करोड़ है। इसके अलावा उनके पास ऐसे ESOP भी हैं, जो भविष्य में एक्सरसाइज करने पर करीब ₹30 करोड़ की अतिरिक्त वैल्यू दे सकते हैं। वहीं, CIO श्रीनिवासन रामा अय्यर के पास 18.25 लाख वेस्टेड शेयर हैं, जिनकी कीमत करीब ₹105 करोड़ है। उनके पास मौजूद अनवेस्टेड ऑप्शंस की संभावित वैल्यू भी लगभग ₹51 करोड़ बताई गई है।

केवल यही दो अधिकारी नहीं, बल्कि कंपनी के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी आईपीओ से भारी फायदा हुआ है। स्रीनिवास जैन (चीफ स्ट्रेटजी, डिजिटल & टेक्नोलॉजी) एंड हेड ऑफ इंवेस्टर रिलेशन) की हिस्सेदारी करीब ₹59 करोड़, राजीव राधाकृष्णन (Chief Investment Officer – Fixed Income) की लगभग ₹36 करोड़, अपर्णा निर्गुडे (Chief Risk Officer) की करीब ₹31 करोड़ और विनया दातार (Chief Compliance Officer) की हिस्सेदारी लगभग ₹21 करोड़ की हो गई है। इसके अलावा कंपनी के CFO, HR प्रमुख, साइबर सिक्योरिटी प्रमुख और कई फंड मैनेजर भी करोड़पति क्लब में शामिल हो गए हैं।

दरअसल, SBI फंड्स ने साल 2018 में अपना ESOP प्रोग्राम शुरू किया था। उस समय कर्मचारियों को ₹39 से ₹455 प्रति शेयर के बीच ऑप्शन दिए गए थे। अब जब कंपनी का आईपीओ ₹574 प्रति शेयर पर आया, तो इन शेयरों की कीमत कई गुना बढ़ गई। यही वजह है कि वर्षों तक कंपनी के साथ जुड़े रहने वाले कर्मचारियों को आज इसका बड़ा आर्थिक लाभ मिला।

कंपनी के आईपीओ को भी निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। लिस्टिंग से पहले ही 129 बड़े एंकर निवेशकों से कंपनी ने करीब ₹2,663 करोड़ जुटाए थे। इनमें ब्लैकरॉक (BlackRock) और गोल्डमैन सैच (Goldman Sachs) जैसे वैश्विक निवेशक भी शामिल रहे। इसके अलावा कंपनी ने पहले ही लगभग ₹1,880 करोड़ का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट भी पूरा कर लिया था।

तीन दिन तक खुले इस आईपीओ को निवेशकों ने हाथोंहाथ लिया। पूरा इश्यू करीब 42 गुना सब्सक्राइब हुआ। QIB (Qualified Institutional Buyers) का हिस्सा करीब 140 गुना, NII (Non-Institutional Investors) का हिस्सा 22.5 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 3.6 गुना सब्सक्राइब हुआ। कई ब्रोकरेज हाउस ने भी इस आईपीओ को “सब्सक्राइब” रेटिंग दी थी और SBI के मजबूत ब्रांड, व्यापक नेटवर्क तथा एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।

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