रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून किसानों के लिए राहत लेकर आया है। प्रदेश में अब तक 557.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले दस वर्षों की इसी अवधि की औसत वर्षा 541.2 मिमी का 103 प्रतिशत है। यानी राज्य में अब तक सामान्य से अधिक बारिश हुई है। अनुकूल मौसम का असर खेती पर भी दिख रहा है और प्रदेश में खरीफ फसलों की बोनी तेजी से आगे बढ़ी है।
कृषि विभाग के अनुसार इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 41.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का करीब 85 प्रतिशत है।
कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक बारिश
राज्य स्तरीय वर्षा प्रतिवेदन के मुताबिक कई जिलों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ 193.2 प्रतिशत वर्षा के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बाद नारायणपुर में 153 प्रतिशत, महासमुंद में 146.7 प्रतिशत, रायपुर में 135 प्रतिशत, गरियाबंद में 134.3 प्रतिशत, जांजगीर-चांपा में 130.7 प्रतिशत, बलौदाबाजार में 124.1 प्रतिशत, बालोद में 123 प्रतिशत, धमतरी में 118.6 प्रतिशत, दुर्ग में 117 प्रतिशत, सक्ती में 115.7 प्रतिशत, बलरामपुर में 111.3 प्रतिशत, बिलासपुर में 111 प्रतिशत, मुंगेली में 106.5 प्रतिशत, राजनांदगांव में 106.1 प्रतिशत और दंतेवाड़ा में 106 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है।
वहीं कोरिया, कोरबा, रायगढ़, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और सूरजपुर में वर्षा सामान्य के आसपास रही है। दूसरी ओर सुकमा, सरगुजा, बीजापुर, कांकेर, जशपुर, बेमेतरा और बस्तर जैसे जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है।
धान की बोनी ने पकड़ी रफ्तार
कृषि विभाग के अनुसार अब तक धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल सहित विभिन्न खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है। धान की खेती के लिए इस वर्ष 38.78 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके मुकाबले अब तक 34.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बोनी पूरी हो चुकी है।
अल नीनो के असर से निपटने की तैयारी
विभाग ने बताया कि मौसम की शुरुआत में अल नीनो के प्रभाव के कारण बोनी प्रभावित हुई थी, लेकिन बाद में मानसून सक्रिय होने से स्थिति में सुधार आया। कृषि विभाग ने अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए पहले से कार्ययोजना तैयार की थी, जिसका लाभ किसानों को मिला।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सप्ताहों में भी मानसून की सक्रियता बनी रहती है, तो खरीफ उत्पादन, जलाशयों में जलभराव और भू-जल स्तर में और सुधार होने की संभावना है।


















