आवारा कुत्तों के प्रबंधन, नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण के साथ डॉग-बाइट की घटनाओं पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने निर्देशों के पालन की अद्यतन स्थिति बताते हुए अनुपालन शपथपत्र मांगा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर अब तक किए गए कामकाज की जानकारी अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।
हाईकोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
इस मामले में मंगलवार को चीफ जस्टिस के. आर. महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा।
अदालत ने राज्य सरकार से आवारा कुत्तों के प्रबंधन, उनकी नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण सहित डॉग-बाइट की घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की अद्यतन स्थिति बताने को कहा है।
सरकार को पेश करना होगा शपथपत्र
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ सरकार को यह बताना होगा कि राज्य में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और उनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। इसमें नसबंदी अभियान, एंटी रेबीज टीकाकरण और कुत्तों के काटने की घटनाओं पर नियंत्रण के उपायों की जानकारी शामिल होगी।
पिछली बार हुई सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर, केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी तथा प्रतिवादी 10 और 11 की ओर से अधिवक्ता धीरज कुमार वानखेड़े उपस्थित हुए थे. इससे पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज सिविल रिट याचिका (क्रमांक 5/2025) और संबंधित मामलों में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों के प्रबंधन तथा अपने निर्देशों के पालन का ब्योरा शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. इसके तहत हाईकोर्ट को भी अपने-अपने राज्यों में अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र पर विचार करते हुए कहा था कि सरकार ने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर, डॉग शेल्टर, नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम, फीडिंग स्पेस की पहचान, अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा, पेट्रोलिंग टीम, हेल्पलाइन और जागरूकता कार्यक्रम जैसे कदम उठाए हैं. हालांकि, डॉग-बाइट की घटनाओं की रोकथाम और आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए इन व्यवस्थाओं का सभी जिलों में प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है.
निराकरण की जानकारी देनी होगी
पूर्व में ही हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे संबंधित विभागों, नगरीय निकायों और जिला प्रशासन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 का पालन सुनिश्चित कराएं. नए शपथपत्र में जिलेवार अनुपालन, नसबंदी एवं टीकाकरण किए गए कुत्तों की संख्या, सेंटर और शेल्टर की स्थिति, सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा तथा हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के निराकरण की जानकारी देनी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी हाईकोर्ट को हर चार महीने में अनुपालन की समेकित रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है.


















