Jacqueline Fernandez Money Laundering Case: अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने 200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली की ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 11 जून को सुनवाई करेगा।
जैकलीन फर्नांडिस ने सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की है। अभिनेत्री का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और आरोप तय करने के आदेश में कई कानूनी खामियां हैं। उन्होंने अदालत से मामले की निष्पक्ष समीक्षा करने की अपील की है। याचिका में कहा गया है कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय करना उचित नहीं है।
11 जून को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार करते हुए इसे 11 जून के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत इस बात पर विचार करेगी कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय करने का आदेश कानूनन सही था या नहीं और क्या मामले की आगे की कार्रवाई उसी आधार पर जारी रहनी चाहिए।
पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपों से किया था इनकार
इससे पहले 3 जून को जैकलीन फर्नांडिस दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई थीं। उस दौरान उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। अभिनेत्री का कहना है कि उनका किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है और उन्हें मामले में गलत तरीके से घसीटा गया है। यह हाई-प्रोफाइल मामला कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा हुआ है।
सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है मामला
जांच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश ने जेल में रहते हुए एक बड़े कारोबारी की पत्नी से करीब 200 करोड़ रुपये की कथित जबरन वसूली की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि इस वसूली से प्राप्त धन का एक हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया गया। जांच के दौरान यह भी दावा किया गया कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को कई महंगे उपहार दिए थे।
महंगे गिफ्ट्स को लेकर भी उठे सवाल
ईडी के अनुसार, जैकलीन को लग्जरी कारें, महंगे गहने, ब्रांडेड हैंडबैग और कुछ दुर्लभ पालतू जानवर उपहार स्वरूप दिए गए थे। यही कारण है कि जांच एजेंसी इस मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है। अब 11 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस हाई-प्रोफाइल मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



















