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मनकामेश्वर मंदिर: ‘काम’ को भस्म करके भगवान शिव स्वयं हुए विराजमान, दर्शन मात्र से पूर्ण होती है मनोकामना

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन उनकी उपासना की जाती है। यह पर्व आते ही शिवायलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उत्तर प्रदेश के मंदिरों की बात की जाए, तो यहां कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारिक शिव मंदिर हैं, जहां महाशिवरात्रि के दिन भक्तों की विशेष भीड़ देखी जाती है। क्योंकि इन मंदिरों की अपनी मान्यताएं हैं। प्रयागराज में एक ऐसा ही भगवान शिव का मंदिर है जहां महाशिवारात्रि के दिन भोले बाबा के भक्त हजारों की में आते हैं। यहां पूरे दिन भक्त को भीड़ रहती है। चलिए जानते हैं कि भगवान शिव का यह मंदिर कौन सा है।

मनकामेश्वर मंदिर, प्रयागराज
दरअसल, हम बात कर रहे हैं मनकामेश्वर महादेव मंदिर की, जो प्रयागराज में यमुना के उत्तरीतट पर स्थित है। यह मंदिर प्रयागराज किला के करीब है। यहां भगवान शिव का लिंग प्रतिस्थापित है। इस में महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक, महाभिषेक, महामृत्युंजय जाप कराने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में सिर्फ दर्शन करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही यहां दर्शन-पूजन से शारीरिक, मानसिक कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इस मंदिर यानी कामेश्वर पीठ का जिक्र पुराणों में मिलता है। इसी धाम में ‘काम’ को भस्म करके भगवान शिव स्वयं विराजमान हुए हैं। मनकामेश्वर मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित है।

श्रीराम ने की थी पूजा-अर्चना
एक कथा के मुताबिक त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्षण के साथ वनवास जा रहे थे, तब श्रीराम ने ने मनकामेश्वर मंदिर में शिवजी की पूजा-अर्चना की थी। साथ ही उन्होंने जलाभिषेक कर अपने मार्ग में आने वाली तमाम विघ्न-बाधाओं को दूर करने की कामना की थी। इसलिए इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से अगर शिव जी की पूडा अर्चना की जाए, तो जीवन में विघ्नों का नाश होता है और मनोकानाएं भी पूर्ण होती है। यही वजह है कि यहां भक्तों की सावन और महाशिवरात्रि के वक्त भीड़ देखी जाती है।

चित्रकूट की ओर रवाना
मान्यता है यहां विश्राम कर भगवान श्री राम चित्रकूट की ओर गए थे। साथ ही इस मंदिर को लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि अकबर की पत्नी जोधाबाई जब प्रयागराज आईं , तब वो किले के निकट स्थित इस मंदिर की पूजा अर्चना की थी।

शृणमुक्तेश्वर मंदिर और हनुमाम जी की प्रतिमा भी है
मनकामेश्वर मंदिर के परिसर में ही शृणमुक्तेश्वर मंदिर है। यहां पर संगम में स्नान करने के बाद पूजन करने से पिशाच बाबा से मुक्ति मिलती है। इसलिए इसे पिशाचमोचन भी कहते हैं। यहां पर दर्शन करने से यदि किसी का पिशाच योनि में जन्म हुआ हो तो मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इसके पश्चिम में कामतीर्थ है यहां दर्शन करने से काम भावनाओं पर भी नियंत्रण होता है और मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में एक हनुमान जी की दक्षिणामुखी प्रतिमा भी है। शिव जी के साथ भक्त उनके दर्शन के लिए भी आते हैं।

यहां कैसे पहुंचे
अगर आप भी इस महाशिवरात्रि प्रयागराज के मनकामेश्वर के दर्शन करने चाहते हैं या फिर यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। यह मंदिर प्रयागराज जंक्शन से लगभग 5-7 किमी और रामबाग रेलवे स्टेशन से भी करीब है। मुख्य शहर से ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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