केंद्र सरकार ने देशभर में भारतीय मानक समय (IST) को एक समान और भरोसेमंद राष्ट्रीय समय-संदर्भ के रूप में लागू करने के लिए Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य बैंकिंग, टेलीकॉम, बिजली, परिवहन, डेटा सेंटर और सरकारी डिजिटल सिस्टम समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समय के लिए एक साझा और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रिफरेंस सुनिश्चित करना है। नए नियम 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित किए गए और 29 अगस्त 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुए। ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 180 दिन बाद लागू होंगे। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में समय की गणना और इस्तेमाल में एकरूपता लाना है।
क्या बदलने वाला है?
भारत में IST पहले से ही आधिकारिक समय है. नए नियमों के तहत इसे केवल आधिकारिक समय के रूप में रखने के बजाय कानूनी रूप से मान्य और वैज्ञानिक रूप से ट्रेस करने योग्य राष्ट्रीय समय संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था की जा रही है. सरल शब्दों में, महत्वपूर्ण डिजिटल और व्यावसायिक सिस्टम जिस समय का इस्तेमाल करते हैं, वह समय आखिरकार भारत के IST से जुड़ा और वेरिफाई किया जा सके, यही इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है.
ट्रेस करने योग्य समय क्या होता है?
कंप्यूटर या सर्वर की घड़ी किसी टाइम सेवर से सिंक्रनाइज होती है. इसके लिए सबसे आम तकनीक नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल (NTP) है. अगर कोई सिस्टम ऐसे एनटीपी सर्वर से अपना समय लेता है जिसका समय IST से ट्रेस करने योग्य है, तो उस सिस्टम के समय को वापस भारत के नेशनल टाइम रिफरेंस तक जोड़ा जा सकता है.
इसे ऐसे समझें
कंप्यूटर/सर्वर → NTP server → IST reference ज्यादा सटीक समय की जरूरत वाले सिस्टम में Precision Time Protocol (PTP), satellite links और optical fibre जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है.
IST तैयार कौन करता है?
CSIR-National Physical Laboratory (NPL) भारत का नेशनल मेट्रोलॉजी इंस्टीट्यूट है और IST का नेशनल कस्टोडियन है. NPL atomic clocks के आधार पर भारत का national time scale तैयार और maintain करता है. यह समय अंतरराष्ट्रीय reference Coordinated Universal Time (UTC) से भी traceable रखा जाता है. NPL के अनुसार IST की UTC के साथ traceability कुछ nanoseconds के स्तर तक रखी जाती है.
NavIC की भूमिका क्या है?
IST को सैटेलाइट के जरिए उपलब्ध कराने में ISRO का NavIC भी महत्वपूर्ण है. NavIC सैटेलाइट में atomic clocks होते हैं और NavIC का timing infrastructure IST से traceable है. इसका मतलब satellite-based systems के जरिए भी IST से जुड़ा सटीक समय प्राप्त किया जा सकता है. इससे भारत के पास सैटेलाइट-आधारित टाइमिंग के लिए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध रहता है.
देश के अलग-अलग हिस्सों में भी समय की व्यवस्था
IST को पूरे देश में उपलब्ध कराने के लिए पांच रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरीज़ (RRSLs) में सेकेंडरी टाइम स्केल्स स्थापित किए गए हैं.
ये केंद्र हैं:
- अहमदाबाद
- बेंगलुरु
- भुवनेश्वर
- फरीदाबाद
- गुवाहाटी
इनका समय NPL के IST से लगातार traceable रखा जाता है.
इसकी जरूरत क्यों है?
आज बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, टेलीकॉम, बिजली व्यवस्था, रेलवे, डेटा सेंटर और सरकारी IT सिस्टम में हर गतिविधि के साथ समय दर्ज होता है. अगर अलग-अलग सिस्टम की घड़ियों में अंतर हो, तो किसी transaction या घटना का सही समय तय करना मुश्किल हो सकता है. एक सामान्य समय संदर्भ से अलग-अलग सिस्टम में दर्ज timestamps को आपस में मिलाना आसान होगा. इसका फायदा साइबर सिक्योरिटी में भी हो सकता है. साइबर हमले की जांच में अलग-अलग कंप्यूटर और नेटवर्क में दर्ज घटनाओं को समय के आधार पर जोड़ना जरूरी होता है.
आम लोगों पर क्या असर होगा?
आम लोगों के लिए मोबाइल या घड़ी का समय बदलने वाला नहीं है. IST भारत का आधिकारिक समय पहले से है. नए नियमों का मुख्य असर उन डिजिटल और क्रिटिकल सिस्टम पर होगा जिन्हें सटीक और एक ही रिफरेंस टाइम की जरूरत होती है.
One Nation, One Time का मतलब
इसका सीधा मतलब है कि देश के महत्वपूर्ण सिस्टम के लिए IST को साझा और कानूनी रूप से मान्य टाइम रिफरेंस बनाया जाए और अलग-अलग तकनीकों के जरिए उसे देशभर में उपलब्ध कराया जाए. इसके लिए NPL, ISRO, NIC और Regional Reference Standard Laboratories मिलकर राष्ट्रीय टाइमिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं. यानी यह घड़ियों का समय बदलने की योजना नहीं, बल्कि देश के डिजिटल और महत्वपूर्ण infrastructure को एक भरोसेमंद भारतीय समय-संदर्भ से जोड़ने की व्यवस्था है.


















