मोबाइल हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. हम एक भी दिन मोबाइल के बिना नहीं रह सकते. हमें मोबाइल को चार्ज भी करना पड़ता है. हवाई अड्डों, बस स्अेशनों आदि जगहों पर मोबाइल के चार्जिंग स्टेशन बने होते हैं.
जब हम बाहर जाते हैं तो मोबाइल में बैटरी कम होने पर हम इन चार्जिंग स्टेशन पर फोन चार्ज पर लगा देते हैं. हालांकि पब्लिक प्लेस पर मोबाइल फोन को चार्ज करना बेहद खतरनाक हो सकता है. कई लोगों के बैंक अकाउंट से लाखों रुपये निकाले जा चुके हैं. दरअसल हैकर्स और साइबर क्रीमिनल्स जूस जैकिंग के जरिए लोगों को लाखों रुपयों की चपत लगा चुके हैं.
क्या है जूस जैकिंग
जूस जैकिंग असल में एक तरह का साइबर या वायरस अटैक होता है. इसमें क्रिमिनल पब्लिक प्लेस जैसे- एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या मॉल में इस्तेमाल होने वाले यूएसबी चार्जिंग पोर्ट के जरिए यूजर्स के मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या दूसरे डिवाइस में मैलवेयर इन्स्टॉल कर पर्सनल डेटा चुरा लेते हैं. जूस जैकिंग के जरिए हैदराबाद में एक कंपनी के सीईओ के अकाउंट से 16 लाख रुपये निकाल लिए गए थे. ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं.
फोन हो जाता है चार्ज लेकिन खाता खाली
जूस जैकिंग में जब आप सार्वजनिक जगहों पर अपने मोबाइल को चार्ज करने के लिए चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल करते हैं तो इसी पोर्ट के जरिए मोबाइल फोन पर साइबर अटैक होता है. लोग अकसर किसी कैफे, रेलवे स्टेशन, मेट्रो, बस स्टैंड या एयरपोर्ट पर जहां चार्जिंग पोर्ट खाली दिखता है, मोबाइल चार्ज में लगा देते हैं. आपका मोबाइल तो चार्ज होता है, लेकिन अकाउंट खाली हो जाता है. इस दरमियान आपके फोन पर मैलवेयर का साइबर अटैक हो सकता है.
ऐसे हैक होता है फोन
जूस जैकिंग में साइबर क्रिमिनल पब्लिक प्लेस पर लगे मोबाइल चार्जिंग स्टेशनों को हैक कर लेते हैं. जैसे ही आप अपना फोन वहां चार्जिंग के लिए लगाएंगे, तो आपके फोन के यूएसबी पोर्ट के जरिए कोई मैलवेयर आपके फोन में इंस्टॉल हो जाएगा. इससे फोन की ऐक्सेस हैकर तक हो जाएगी.
पब्लिक प्लेस पर लगे 22 फीसदी चार्जिंग स्टेशन सुरक्षित नहीं
साइबर सिक्यॉरिटी पर रिसर्च कर रही संस्था ‘अलर्ट इंडियंस’ ने दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और हैदराबाद में रिसर्च में पाया था कि पब्लिक प्लेस पर लगे 22 फीसदी चार्जिंग स्टेशन सुरक्षित नहीं थे या पहले से हैकर्स की गिरफ्त में थे. एक अन्य स्टडी में पाया गया कि पब्लिक प्लेस में उपलब्ध फ्री वाईफाई में 33 फीसदी कनेक्शन ऐसे थे, जो फोन या लैपटॉप में मैलवेयर/वायरस पुश कर रहे थे, जिसके जरिए फोन और लैपटॉप की एक्सेस हैकर तक पहुंच सकती थी.


















