ब्रेकिंग खबरें

रायपुर संभाग

रायपुर : दो कार्यालय के चलते हो रही पैसे की बर्बादी

रायपुर: जंगल सफारी का एक कार्यालय राजातालाब गौरवपथ स्थित वन मंडल कार्यालय में है, तो दूसरा कैंप कार्यालय नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी पार्किंग में बनाया गया है. पिछले 10-15 दिनों से जंगल सफारी के डायरेक्टर द्वारा कैंप कार्यालय बनाकर रखा गया है, जिसमें सिर्फ 4-6 कर्मचारी जाते हैं.

इसके लिए बकायदा नवा रायपुर से वन मंडल कार्यालय तक लाने ले जाने के लिए एक बस का इंतजाम किया गया है, जो सुबह 10 बजे 4 कर्मचारियों ले जाती है और शाम को छोड़कर यहीं वन मंडल कार्यालय में खड़ी रहती है. वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि नवा रायपुर में जंगल सफारी के कार्यालयों में एक चिंता का सबब बन रहा है. कैंप कार्यालय में शासन की धन की बर्बादी के साथ-साथ पर्यटकों के बस का उपयोग कर्मचारियों को लाने ले जाने में कर रहे हैं.

पर्यटक भ्रमण के लिए बस कंडम

जंगल सफारी में बस की कमी है, जो बसें चल रही है वह भी पूरी तरह से कंडम हो गई है. 2016 में जो बस मिली थी, उन बसों में दो-चार बस ही पर्यटकों को भ्रमण करा रही है, बाकी सब खराब हो चुके हैं. जंगल सफारी जाने वाले पर्यटक जब जाते हैं, तो उनकी शिकायत रहती है, कि समय पर बस नहीं मिली तो बस पूरी तरह से कंडम है. इसके बाद भी रोजाना कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए 50 किलोमीटर का सफर एक बस कर रही है. जबकि सफारी में पर्यटकों को 5 किलोमीटर का भ्रमण कराने में 1600 रुपए एक राउंड का मिलता है.



27 में 25 वाहन खराब, 2 बस ही चल रहे

जंगल सफारी में खुले में विचरण करते वन्यजीवों को देखने जाने वालों को निराशा हाथ लग रही है. इसका सबसे बड़ा कारण बस है. शनिवार से रविवार तक एक एसी बस गौरवपथ स्थित वन मंडल कार्यालय में खड़ा रहता है. जंगल सफारी में संचालित 27 में से 25 वाहन खराब हैं, महज दो ही बसें चालू हालत में हैं. दो बस जी-20 के दौरान मंगाया गया था, जिसमें एक एसी बस कार्यालय में खड़ा हो जाता है. अगर एसी बस को पर्यटकों के लिए सफारी में रखा जाए तो 4800 रुपए की कमाई होगी. एसी बस के लिए 150 रुपए प्रति व्यक्ति रखा गया है.



शिकायत के बाद भी बना कैंप कार्यालय

वन मंडल अधिकारी कार्यालय में संचालित जंगल सफारी कार्यालय को जंगल सफारी के डायरेक्टर द्वारा नवा रायपुर स्थानांतरित करने का कर्मचारी संगठन ने विरोध किया है. इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाने की मांग निर्वाचन आयोग से की गई है. इसके बाद कैंप कार्यालय बनाया गया.

What's your reaction?

Related Posts