मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीजेपी के दम पर बीएमसी की 100 सीटें जीतने के दावे ने महायुति में खलबली मचा दी है. शिवसेना शिदि गुट को अब मुंबई महानगरपालिका चुनाव में अपनी मौजूदगी साबित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बीजेपी 227 सीटों में से 150 तक पर अड़ गई है. इससे शिंदे सेना के लिए सिर्फ 60-70 सीटें बचती हैं, जिससे गुट में असंतोष और उद्धव गुट को हमले का मौका मिल रहा है. फडणवीस का कॉन्फिडेंस साफ है कि बीजेपी अकेले 100 सीटें जीतेगी. पार्टी कम से कम 140-150 सीटें लड़ने की तैयारी में है, जिससे बचती 87 सीटें शिंदे गुट, अजीत पवार को एनसीपी और रामदास आठवले की आरपीआई में बांटी जाएंगी. शिंदे की टेंशन यह है कि यदि 60-70 से ज्यादा सीटें नहीं मिलीं, तो पूर्व नगरसेवकों को टिकट कैसे दें? कम सीटों पर समझौता करने से गुट टूट सकता है. राजनीतिक जानकारों की राय है कि मुख्य मुकाबला बीजेपी और उद्धव ठाकरे के बीच है, लेकिन शिदि सेना मुंबई में खुद को असली शिवसेना साबित करने के दबाव में है. 2022 शिवसेना और 2023 एनसीपी विभाजन के बाद 2024 लोकसभा में महाविकास अघाड़ी की जीत हुई, जबकि विधानसभा में महायुति ने जोरदार वापसी को. अब बीएमसी सहित 29 निकाय चुनावों में बीजेपी के दावे से शिंदे की टेंशन बढ़ गई है और गठबंधन एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं. उद्धव गुट का हमला तैयार है कि शिंदे बीजेपी की कठपुतली बन गए और मुंबई में कोई जगह नहीं बची. शिंदे की मजबूरी यह है कि न कम सीटों पर मानने से चगावत का खतरा है, जबकि ज्यादा मांगने से महायुति टूट सकती है. शिंदे गुट के पास 128 पूर्व नगरसेवक है, जो शिवसेना में विभाजन के बाद शिंदे के साथ आए हैं.
असली शिवसेना बनाम नकली शिवसेना
असली शिवसेना किसकी है, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन बीएमसी चुनाव में मुंबई की जनता तय करेगी कि ‘शिवसेना’ किसकी है. स्थानीय निकाय चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बीएमसी चुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है. सत्ताधारी बीजेपी जहां पहली बार अपना मेयर बनाने का सपना देख रही है, वहीं लगभग ढाई दशक तक बीएमसी की सत्ता पर काबिज रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना सत्ता में वापसी के लिए रणनीति बना रही है. लेकिन, सबकी निगाह एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर है, जिसे वह असली शिवसेना कहते हैं.



















