रायगढ़ जिले के जैजेपुर गांव का एक छोटा सा आंगन, वहीं से शुरु हुई वह कहानी जो अब नेशनल बैडमिंटन सर्किट में नई चमक बनकर उभर रही है। यही आंगन था जहां दस साल की तनु चंद्रा मजे मजे में रैकेट घुमाती थी। परिवार में कोई खिलाड़ी नहीं, न स्पोर्ट्स का माहौल लेकिन प्रतिभा ऐसी कि अब वही बच्ची देश की उभरती शटलर बनकर गुवाहाटी के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इंटरनेशनल कोचों की निगरानी में ट्रेनिंग ले रही है। आज तनु भारत की उन चुनिंदा जूनियर खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्हें देखकर विशेषज्ञ कहते हैं, यह भविष्य की साइना नेहवाल बन सकती है।
11 साल में गांव से राजधानी का बड़ा कदम
तनु के पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षा कार्मी और मां गृहिणी। अर्थिक रूप से सीमित लेकिन उम्मीदें बड़ी थीः राज्य स्तरोन प्रतियोगिता के दौरान बिलासपुर में जूनियर इंडिया बैडमिंटन कीच और छत्तीसगढ़ संघ के सचिव संजय मिश्रा की नजर पहली बार तनु पर पड़ी। तेज फुटवर्क, शॉट सलेबशन और खेल में गजब का धर्व, सिर्फ एक झलक में ही पारखी कोच समझ गए कि यह बच्ची साधारण नहीं। उन्होंने तत्काल तनु के पिता से बात की। सुझाव था बेहतर ट्रेनिंग चाहिए इसे रायपुर भेजिए। निर्णय कठिन था, उम्र छोटी श्री, लेकिन परिवार ने जोखिम उठाया। तनु अपनी मां के साथ पुलिस लाइन स्थित बैडमिंटन अकादमी के पास किराए के घर में शिफ्ट हो गई। बस यहीं से उसकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
नेशनल सेंटर में इंटरनेशनल कोचों की टीम के साथ ट्रेनिंग
तनु बर्तमान में अंडर-18 कैटेगरी की खिलाड़ी है और शानदार प्रदर्शन की वजह से उसे हावर ट्रेनिंग के लिए चुना गया है। 2024 से गुवाहाटी स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कोरिया, रूस और मलेशिया के विशेषत प्रशिक्षकों से हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग ले रही है। अपनी पढ़ाई वह अभी भी जैजेपुर के स्कूल से कार रही है और सिर्फ परीक्षओं के समय गंच जाती है। अभी वह 11वीं बजा में है। इस साल उसने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और जूनियर नेशनल में रजत पदक जीतकर पूरे भारतीय जूनियर सर्किट में नई पहचान बनाई। बिहार में हुए खेलो इंडिया बैडमिंटन में भी वह अब्बल रही।
खासियत-लंबा कद, धैर्य और अटैक का गजब संतुलन
18 साल की तनु की हदट करीब 5 फीट ॥ इंच, कंधे और कलाई बेहद मजबूत, रैली के दौरान तेज स्मैश इसकी पहचान बन चुके हैं। टॉस ड्रॉप से लेकर मेट डिफेंस तक उसके लवे हाथ-पैर और टेज पहुंच उसे एक ऑलराउंडर शटलर बनाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि पॉइंट मिलने पर भी तनु शोर मचाने या चीखने वाली शटलर नहीं। का 15-20 सेकंड के छोटे ब्रेक में खुद का विश्लेषण करती है। कहां अच्छा किया, ज्या सुधार चाहिए खेल में वहीं परिपक्वता उसे बाकी जूनियर खिलाड़ियों से अलग खड़ा करती है।
वर्ल्ड रैंकिंग खिलाड़ी को मात
डबल्स में तनु पहले से सफल थी, लेकिन उसका लक्ष्य सिंगल्स में चमकना था। कोच संजय मिश्रा ने उसे आठ महीने का फोकस चैलेंज दिया। सिंगल्स में खुद को साबित करो। फिर आया निर्णायक मौका। वल्डं जूनियर गर्ल्स टीम का ट्रायल। इसमें तनु ने वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग में 28वें नंबर की खिलाड़ी उन्नति हुड्डा को हराकर सबको चौंका दिया। यह जीत सिर्फ मैच नहीं थी। यह उसके आत्मविश्वास की उड़ान थी जिसने उसे भारतीय जूनियर बैडमिंटन का उभरता सितारा बना दिया।



















