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केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह कल नई दिल्ली में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों पर राज्य पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करेंगे

नई दिल्ली। पंचायती राज मंत्रालय 3 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में राज्य पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करेगा। इस कार्यशाला में सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों पर चर्चा की जाएगी। कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल भी उपस्थित रहेंगे। इसमें विभिन्न राज्यों के पंचायती राज मंत्री और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला में सोलहवें वित्त आयोग की वर्ष 2026–31 की अवधि के लिए की गई सिफारिशों पर विचार-विमर्श होगा। आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये की राशि देने की सिफारिश की है। चर्चा का मुख्य विषय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी सोलहवें वित्त आयोग की ग्रामीण स्थानीय निकाय (आरएलबी) अनुदान की संचालन संबंधी (ऑपरेशनल) गाइडलाइंस होंगी। विचार-विमर्श में वित्त आयोग के अनुदान जारी करने और उसके उपयोग से जुड़े नियमों, जरूरी अनुपालन (कम्प्लायंस), अनुदान जारी करने की प्रक्रिया, संस्थागत तैयारियों तथा पंचायतों द्वारा धनराशि का समय पर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरे देश में वित्तीय विकेंद्रीकरण को और मजबूत बनाना है।

 सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप, कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय मजबूती पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए उनकी स्वयं के स्रोतों से होने वाली आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होगी। यह कार्यशाला राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने सर्वोत्तम अनुभव यानी बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने, कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने तथा वित्त आयोग के अनुदान के प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपायों का आदान-प्रदान करने का अवसर भी प्रदान करेगी। उम्मीद है कि इस विचार-विमर्श से केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और मजबूत होगा तथा पंचायतों को बेहतर शासन, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाएं और समावेशी ग्रामीण विकास उपलब्ध कराने के लिए एक मजबूत कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। यह विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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