NIA Jurisdiction Before 2019: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जाली नोट से जुड़े मामलों में यह साफ कर दिया है कि चाहे अपराध 2019 के एनआईए संशोधन अधिनियम से पहले हुआ हो, फिर भी उसका मुकदमा सिर्फ एनआईए की विशेष अदालत में ही चलेगा.
न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने इस बात पर फैसला सुनाया और एनआईए की विशेष अदालत, बिलासपुर का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें मामला सत्र न्यायालय जांजगीर-चांपा को भेज दिया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि यह तर्क गलत है कि 2019 से पहले हुए अपराधों पर एनआईए विशेष अदालत का अधिकार नहीं बनता.

मामला क्या था?
यह मामला जाली नोट से जुड़ा है. आरोपी पर आईपीसी की धारा 489-ए, 489-बी, 489-सी, 201 और 34 के तहत केस दर्ज है. FIR साल 2018 में दर्ज हुई थी.
पूरक चार्जशीट के बाद एनआईए की विशेष अदालत, बिलासपुर ने 5 जनवरी 2022 को केस की सुनवाई शुरू की और चार गवाहों के बयान भी दर्ज किए.
लेकिन 17 सितंबर 2025 को विशेष अदालत ने यह कहकर केस को सत्र न्यायालय जांजगीर-चांपा भेज दिया कि यह अपराध 24 जुलाई 2019 से पहले का है, इसलिए विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं बनता.
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने एनआईए अधिनियम की सूची (अनुसूची) देखकर कहा कि धारा 489-ए से 489-ई तक के आईपीसी के अपराध पहले से ही एनआईए अधिनियम की सूची में थे. 2019 के संशोधन में सिर्फ कुछ नए अपराध जोड़े गए और क्रम में बदलाव हुआ, लेकिन इन धाराओं को पहली बार शामिल नहीं किया गया.
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि एनआईए अधिनियम की धारा 22(1) के तहत राज्य सरकार ने सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर को विशेष न्यायालय घोषित किया है. यह अदालत जांजगीर-चांपा समेत अन्य जिलों के मामलों की सुनवाई कर सकती है. साथ ही धारा 22(4) के मुताबिक, जो भी पुराने मामले हैं, वे अपने आप विशेष अदालत में चले जाएंगे.



















