पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर से इजाफा किया गया है। दिल्ली में आज 23 मई 2026 को पेट्रोल की कीमतों में 0.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एक महीने में तीसरी बार कीमतों को बढ़ाया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल का रेट 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का रेट 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
कहां कितना मंहगा हुआ पेट्रोल और डीजल? (Petrol Diesel latest price)
पेट्रोल का रेट डीजल का रेट
दिल्ली – 99.51 रुपये (0.87) 92.49 रुपये (+ 0.91)
कोलकाता – 110.64 रुपये (+0.94) 97.02 (+0.95)
मुंबई – 108.49 रुपये ((+0.90) 95.02 रुपये (+0.94)
चेन्नई – 105.31 रुपये (0.82) 96.98 (0.87)
कब-कब बढ़े दाम? (Petrol Diesel price hike news)
इससे पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे का इजाफा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किया था। यह दूसरी बार था जब मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी।
इसी महीने में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सबसे पहली बार 3-3 रुपये का इजाफा किया था। बता दें, 15 मई से तीन बार में अबतक पेट्रोल और डीजल का रेट दिल्ली में करीब 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ गया है।
तेल कंपनियों को हो रहा है 1000 करोड़ रुपये का रोजाना नुकसान (Petrol Diesel News)
तीनों सरकारी कंपनियां – इंडियन ऑयल कारपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड ने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में हर दिन 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बता दें, युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल का रेट सातवें आसमान पर है। क्रूड ऑयल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है। मौजूदा स्थिति में अगर सुधार नहीं हुआ तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी जारी रह सकती है।
9 से 12 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम (Petrol Diesel Rates)
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 9 रुपये से 12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। बता दें, कंपनियों को राहत देने और नागरिकों को कीमतों के प्रभाव से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। लेकिन इसके बाद भी तेल कंपनियों की आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है।



















