रायपुर। डूमरतराई क्षेत्र में करोड़ों रुपये के चर्चित जमीन घोटाले मामले में मुख्य आरोपी हितेश चौबे को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और कई नोटिस जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ, ऐसे में उसे राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी को पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। इसलिए अग्रिम जमानत दिए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। मामला रायपुर के डूमरतराई क्षेत्र स्थित एक बहुमूल्य जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मुंबई के अंधेरी वेस्ट निवासी कारोबारी मनमोहन सिंह गाबा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उन्होंने मार्च 2021 में शाइन सिटी ड्रीम रीयल्टर कंपनी से एग्रोहा गृह निर्माण समिति स्थित 7000 वर्गफीट जमीन और भवन को 3 करोड़ 63 लाख 98 हजार रुपये में खरीदा था। यह सौदा विधिवत रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से हुआ था और उन्हें कब्जा भी दे दिया गया था।
हालांकि बाद में नामांतरण प्रक्रिया के दौरान खुलासा हुआ कि इसी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन अलग-अलग लोगों को बेचा जा चुका है। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई। जांच में उप पंजीयक एसके देहारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर रजिस्ट्री प्रक्रिया में मदद की गई। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी हितेश चौबे ने अपनी फर्म ‘मिस होप एंटरप्राइजेस’ के माध्यम से पूरा फर्जीवाड़ा किया। पहले उसने शाइनजेनेक्स कंपनी के साथ जमीन खरीदने का एग्रीमेंट किया और बाद में शपथ-पत्र के आधार पर जमीन अपने भाई रूपेश चौबे के नाम रजिस्ट्री करा दी। इसके बाद रूपेश चौबे ने उक्त जमीन कृष्णकांत रामअवतार तिवारी को बेच दी।
मामले को लेकर पुलिस की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।



















