रायपुर। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया है। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पताल के मेडिकल आईसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है। जनरल मेडिसिन विभाग की देखरेख में मेडिसिन, पल्मोनरी और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले तीन वर्षों से लकवा और याददाश्त संबंधी बीमारी से जूझ रही हैं। बीते वर्ष नवंबर में भी उनकी तबीयत बिगड़ी थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनसे बात कर हालचाल जाना था।
तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने बताया कि देर रात करीब 12 बजे उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। जांच रिपोर्ट में उनके फेफड़ों में पानी भरने और निमोनिया की शिकायत सामने आई है। साथ ही उनका ब्लड प्रेशर भी काफी कम दर्ज किया गया। हालांकि समय पर एम्बुलेंस से एम्स पहुंचाने और तत्काल इलाज शुरू होने के बाद अब उनकी स्थिति पहले से बेहतर बताई जा रही है और डॉक्टरों के अनुसार वे फिलहाल खतरे से बाहर हैं।

तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर उनके परिवार, प्रशंसकों और कला प्रेमियों में चिंता का माहौल है। लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपनी दमदार आवाज और अनूठी प्रस्तुति शैली से इस लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। पंडवानी की कपालिक शैली में प्रस्तुति देने वाली वह पहली महिला लोकगायिका बनीं।
उनका जन्म 8 अगस्त 1956 को दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक के अटारी गांव में हुआ था। जन्म के दिन तीज पर्व होने के कारण उनका नाम तीजन रखा गया। वर्ष 1980 में उन्होंने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, तुर्किये, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस सहित कई देशों की यात्राएं कर पंडवानी कला का प्रदर्शन किया।
देश-विदेश में मिले कई सम्मान
तीजन बाई को कला जगत में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण और वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें नृत्य शिरोमणि सम्मान, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की मानद डी.लिट उपाधि और जापान का प्रतिष्ठित फुकोका पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है।



















