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जाति प्रमाण-पत्र मामलों की सुनवाई में तेजी, 11 प्रकरणों में आदेश जारी करने के निर्देश

रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई) के सभाकक्ष में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में जाति प्रमाण-पत्र एवं सामाजिक प्रस्थिति से जुड़े कुल 19 प्रकरणों की समीक्षा और सुनवाई की गई।

बैठक में सुनवाई के लिए रखे गए 7 प्रकरणों में से 4 मामलों की सुनवाई पूर्ण होने पर आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए। वहीं 2 प्रकरणों में संबंधित पक्षों को पुनः अवसर प्रदान किया गया, जबकि एक मामले में विजिलेंस टीम को दोबारा सोशल स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत 12 प्रकरणों में से 7 मामलों में आदेश जारी करने का निर्णय लिया गया। इनमें 2 प्रकरणों का निपटारा गुण-दोष के आधार पर तथा 5 मामलों में सकारात्मक विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर किया गया। शेष 4 मामलों में सुनवाई के लिए अवसर देने का निर्णय लिया गया।

बैठक में राष्ट्रीय जनजाति आयोग से प्राप्त 55 बैगा समुदाय से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण पर भी चर्चा हुई। समिति ने गौरेला-पैण्ड्रा-मरवाही और मस्तूरी क्षेत्र के अधिकारियों तथा विजिलेंस सेल की संयुक्त टीम गठित कर संबंधित जिलों में अभिलेखों, वंशावली और सामाजिक प्रस्थिति की गहन जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

समिति ने दो प्रकरणों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्षकारों को सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया। अधिकारियों ने इसे पारदर्शी, सुलभ और न्यायसंगत प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

बैठक में आयुक्त आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास डी. राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक हिना अनिमेष नेताम, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी, भू-अभिलेख विभाग के संचालक विनीत नंदनवार सहित समिति के सदस्य एवं जाति जांच प्रकोष्ठ के अधिकारी उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति नियमित रूप से बैठक आयोजित कर जाति प्रमाण-पत्र एवं सामाजिक प्रस्थिति संबंधी मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण कर रही है। समिति सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ सामाजिक प्रस्थिति प्रमाणीकरण अधिनियम-2013 के प्रावधानों के तहत अर्द्ध-न्यायिक संस्था के रूप में कार्य कर रही है।

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