छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू होने जा रही है। अब यात्रियों को स्टेशन परिसर में ही नारियल पानी उपलब्ध होगा। रेलवे प्रशासन ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है और जल्द ही सुविधा शुरू होने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य खासकर गर्मी के मौसम में यात्रियों को प्राकृतिक और स्वस्थ पेय विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि सफर के दौरान उन्हें राहत मिल सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा पहली बार इस स्टेशन पर शुरू की जा रही है और इसके सफल होने पर इसे अन्य स्टेशनों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर पहली बार यात्रियों को नारियल पानी की सुविधा मिलने वाली है. प्लेटफार्म नंबर दो और तीन पर कच्चे नारियल की बिक्री शुरू करने की तैयारी है. रेलवे ने ये पहल रेल यात्रियों को गर्मी के मौसम में सुविधा देने के लिए की है. इससे यात्रियों को सफर के दौरान एक बेहतर और पौष्टिक विकल्प मिलेगा. यह सुविधा न्यू इनोवेटिव आइडिया योजना के तहत दी जाएगी. इसके लिए टेंडर भी हो गया है.
बिलासपुर रेलवे स्टेशन में मिलेगा नारियल पानी
न्यू इनोवेटिव आइडिया योजना के तहत बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो-तीन कच्चे नारियल की बिक्री के लिए कैटरिंग यूनिट स्थापित की जा रही है. यह रेलवे की महत्वपूर्ण योजना है. इसके तहत पूर्व में मसाज सेंटर, ट्रैव्लर्स बुकिंग समेत कुछ नई सुविधाएं दी जा चुकी है. समय-समय यह प्रयास रहता है कि नए-नए आइडिया और आते रहे और उसका लाभ यात्रियों को मिल सके. इसी के तहत नारियल पानी उपलब्ध कराने का प्रपोजल आया.
टेंडर हुआ फाइनल
रेलवे को यह नई सुविधा लगी और खास बात यह है कि यात्रियों के लिए लाभदायक है. इसी वजह से इस पर सहमति की मुहर लगी. सहमति के साथ ही अब टेंडर भी फाइनल हो गया है. बहुत जल्द यात्री सफर के दौरान नारियल पानी पीकर प्यास बुझाकर सेहमंद बनेंगे. इसका सबसे ज्यादा लाभ लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री उठाएंगे. चाय-काफी तो आसानी से उपलब्ध है. कई यात्री इसका सेवन करने से बचते हैं.
दर निर्धारत के लिए रेलवे करा रही बाजार सर्वे
इस सुविधा को शुरू करने से पहले रेलवे की मंशा है कि नारियाली पानी उचित दर उपलब्ध हो। यही कारण है कि इसके लिए रेलवे प्रशासन ने बाजार सर्वेक्षण कराने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि नारियल के विक्रय मूल्य का उचित निर्धारण किया जा सके.



















