रायपुर। छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से भाजपा ने निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरणों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी है। गुरुवार को राजधानी स्थित भाजपा मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में हुई बैठक को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सक्रिय रूप से जुटने लगी है।
बैठक में भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल और प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय ने सुबह 11.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों के अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण देव भी मौजूद रहे।
14 महीने बाद हुई सामूहिक समीक्षा
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 3 अप्रैल 2025 को भाजपा के 36 नेताओं को सत्ता में भागीदारी देते हुए विभिन्न निगम, मंडल, आयोग और परिषदों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके बाद भी कुछ अन्य नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। करीब 14 महीने बाद पहली बार इन सभी पदाधिकारियों के कार्यों की एक साथ समीक्षा की गई।
विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट ली गई
भाजपा सूत्रों के अनुसार निगम, मंडल और बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी भी बनाया गया था। बैठक में उनसे पूछा गया कि प्रभार मिलने के बाद उन्होंने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कितने दौरे किए और संगठनात्मक गतिविधियों में कितनी भागीदारी निभाई। पार्टी नेतृत्व ने आगामी विधानसभा चुनाव 2028 को ध्यान में रखते हुए सभी पदाधिकारियों को अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में दौरे बढ़ाने, मंडल और बूथ स्तर तक पहुंचने, नियमित बैठकें लेने तथा रात्रि विश्राम कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
जनसमस्याओं के समाधान पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए नेताओं ने पदाधिकारियों को जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनने और उनके त्वरित समाधान के लिए प्रयास करने की हिदायत दी। साथ ही कामकाज में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों के पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि सरकार की योजनाओं और नीतियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। पदाधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे सरकार और संगठन के बीच मजबूत कड़ी बनकर कार्य करें।
चुनावी रणनीति का संकेत
राजनीतिक हलकों में इस बैठक को भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी संगठन अब सत्ता में भागीदारी रखने वाले नेताओं की सक्रियता का आकलन कर उन्हें विधानसभा स्तर पर अधिक जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों में तेजी देखने को मिल सकती है।



















