Nirjala Ekadashi: ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है. भीम द्वारा रखे जाने के कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ शाम को घर के मुख्य द्वार, लक्ष्मी मंदिर, पीपल के नीचे और ईशान कोण में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि व मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Nirjala Ekadashi 2026: आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत है. धार्मिक मान्यता है कि ये एक व्रत साल भर के एकदशी व्रतों का पुण्य फल दे देता है. इसकी महिमा का वर्णन शास्त्रों, पुराणों के साथ-साथ महाभारत में भी मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने वेदव्यास जी की सलाह पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा था, ताकि उनको सभी एकादशी व्रतों का पुण्य फल प्राप्त हो जाए.
इसी कारण इस एकदाशी को भीमसेनी एकदशी भी कहा जाता है. इस दिन भक्त कठोर निर्जला उपवास रखकर विधि पूर्वक जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन पूजा-पाठ और व्रत के साथ-साथ कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं. इन्हीं में शामिल हैं दिपक के उपाय. आज शाम को घर की इन चार जगहों पर दीपक अवश्य जलाएं.
निर्जला एकादशी पर शाम को इन जगहों पर जलाएं दीपक
मुख्य दरवाजे: निर्जला एकादशी पर आज शाम को घर के मुख्य दरवाजे पर चौखट के दाईं ओर (जब आप घर से बाहर निकल रहे हों) दीपक अवश्य जलाएं. इस दीपक का मुख दक्षिण दिशा में रखें. ऐसा करने से नकारात्मक उर्जा घर में नहीं आती हैं.
लक्ष्मी मंदिर: अगर संभव हो पाए तो आज लक्ष्मी मंदिर अवश्य जाएं और वहां जाकर भगवान के चरणों में एक दीपक जलाएं.
पीपल के नीचे: आज शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक अवश्य जलाएं. पीपल को बहुत ही पावन वृक्ष माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेवों का वास होता है. मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं.
उत्तर पूर्व दिशा: आज शाम को पूजा स्थल या घर की उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में दीपक जरूर जलाएं. ऐसा करने से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. उनकी कृपा से घर में सुख-समृद्धि और धन धान्य बढ़ता है.


















