रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बाघों की खाल के साथ महाराष्ट्र के दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से खालों की तस्करी कर रहे थे। वन विभाग ने उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में यह कार्रवाई पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के बांदे परिक्षेत्र स्थित छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर की गई। गोपनीय सूचना के आधार पर वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त घेराबंदी कर आरोपियों को रंगे हाथों दबोचा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ब्येश्वर और बाबूराव के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के निवासी हैं। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव बाघ की दो खाल बरामद की गईं।
कई एजेंसियों ने मिलकर चलाया अभियान

वन्यजीव तस्करी के खिलाफ इस संयुक्त अभियान में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के उत्तरी एवं केंद्रीय क्षेत्र, छत्तीसगढ़ वन विभाग के राज्य उड़नदस्ता दल, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग यूनिट तथा भानुप्रतापपुर वनमंडल के स्थानीय वन अमले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तस्करी नेटवर्क की जांच तेज
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। विभाग अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच तेज कर चुका है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
वन विभाग ने कहा कि प्रदेश में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है और संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


















