शेयर बाजार में बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारी गिरावट देखने को मिली, लेकिन इस कमजोरी के बीच जूलरी कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। कई प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों के शेयर 1 से 12 फीसदी तक चढ़ गए। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बाजार गिर रहा था, तब जूलरी शेयरों में तेजी क्यों आई?
मजबूत बिजनेस अपडेट बना सबसे बड़ा कारण
जूलरी कंपनियों की पहली तिमाही (Q1) के शुरुआती कारोबारी अपडेट उम्मीद से बेहतर रहे। सेंको गोल्ड ने सालाना आधार पर करीब 60 फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की, जबकि टाइटन और कल्याण ज्वेलर्स ने भी मजबूत बिक्री के संकेत दिए। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा कि इन कंपनियों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।
सोने की कीमत घटने से कैसे मिलता है फायदा?
आमतौर पर माना जाता है कि सोने के महंगा होने से जूलरी कंपनियों को लाभ होता है, लेकिन कारोबार के लिहाज से स्थिति अक्सर उलट होती है। जब सोने की कीमतें नरम होती हैं तो ग्राहकों के लिए आभूषण खरीदना आसान हो जाता है। खासकर शादी और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे कंपनियों की बिक्री और मुनाफा दोनों में सुधार होता है।
शेयर बाजार भविष्य की कमाई पर लगाता है दांव
शेयर बाजार किसी कंपनी का मूल्यांकन केवल मौजूदा सोने की कीमत के आधार पर नहीं करता, बल्कि आने वाले 12 से 18 महीनों में संभावित कमाई को ध्यान में रखता है। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और पीएन गाडगिल जैसी संगठित कंपनियां लगातार नए स्टोर खोल रही हैं और असंगठित बाजार से हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। यही वजह है कि निवेशकों को इन कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ पर भरोसा है।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सोने-चांदी की दैनिक कीमतों को देखकर जूलरी शेयरों में निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी की बिक्री वृद्धि, विस्तार योजनाएं, मुनाफा, प्रबंधन की गुणवत्ता और वैल्यूएशन का आकलन करना जरूरी है। जिन कंपनियों का कारोबार लगातार मजबूत रहेगा, वे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।


















