रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि मिशन की प्रगति पर न्यायालय लगातार निगरानी रखेगा। डिवीजन बेंच ने मामले को आगे की मॉनिटरिंग के लिए सितंबर 2026 में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामों का अवलोकन किया।
राज्य सरकार ने बताया खर्च का ब्यौरा
राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की समान वित्तीय भागीदारी वाली योजना है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये के अलावा अन्य मदों में 561.41 करोड़ रुपये, यानी कुल 3,561.41 करोड़ रुपये जारी किए। इसके मुकाबले केंद्र सरकार की ओर से 536.53 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की गई, जबकि बाद में 149.50 करोड़ रुपये अतिरिक्त जारी किए गए। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टोकन मद के तहत 306.26 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्र और राज्य के संयुक्त 612.52 करोड़ रुपये का उपयोग पहले से पूर्ण हो चुकी जल योजनाओं के लंबित भुगतानों के लिए किया जा रहा है। साथ ही दावा किया कि राज्य ने अपने निर्धारित अंशदान से अधिक राशि खर्च की है और प्रदेश के प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्र ने गाइडलाइन के पालन को बताया जरूरी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत आगे की वित्तीय सहायता मिशन की ऑपरेशनल गाइडलाइंस के अनुसार निर्धारित शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। केंद्र का कहना था कि उसने योजना के लिए पर्याप्त वित्तीय सहयोग दिया है, जबकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
हाईकोर्ट ने कहा- पेयजल का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। अदालत ने माना कि केंद्र और राज्य दोनों ने धनराशि जारी करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं, लेकिन मिशन की प्रगति की निरंतर समीक्षा जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए डिवीजन बेंच ने जल जीवन मिशन की प्रगति पर न्यायिक निगरानी जारी रखने का फैसला लिया और मामले की अगली सुनवाई सितंबर 2026 में निर्धारित करने के निर्देश दिए।
वेदांता मामले में अवमानना याचिका भी दाखिल
इसी दौरान हाईकोर्ट में सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों ने भी अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव, सक्ती कलेक्टर और डभरा एसडीएम को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद पात्र भू-विस्थापितों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले भत्ते और अन्य लाभ उपलब्ध नहीं कराए गए।


















