रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) ने रूफटॉप सोलर (आरटीएस) संयंत्रों से ग्रिड में दी जाने वाली अतिरिक्त बिजली की खरीद (बायबैक) के लिए नई दरें जारी कर दी हैं। आयोग के आदेश के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.50 रुपये प्रति यूनिट और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.94 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई है। इससे अगले वित्तीय वर्ष से सोलर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिजली पर मिलने वाला भुगतान करीब 22.4 प्रतिशत कम हो जाएगा।
नई दरें डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (डीआरई) विनियमों और राज्य विद्युत वितरण कंपनी से प्राप्त जानकारी के आधार पर निर्धारित की गई हैं। यह दरें उन रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं पर लागू होंगी, जो अपनी जरूरत से अधिक बिजली ग्रिड में आपूर्ति करते हैं।
आयोग के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप रूफटॉप सोलर प्रणाली के लिए एक समान और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना है। हालांकि, खरीद दर में कमी से अतिरिक्त बिजली बेचने वाले उपभोक्ताओं की आय प्रभावित हो सकती है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इसका असर भविष्य में रूफटॉप सोलर परियोजनाओं में निवेश की गति पर भी पड़ सकता है।
ऐसे होता है नेट मीटरिंग का हिसाब
बिजली वितरण कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, नेट मीटरिंग व्यवस्था में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली का पहले उपभोक्ता की मासिक खपत में समायोजन किया जाता है। यदि इसके बाद भी बिजली बचती है तो वह ग्रिड में चली जाती है और उसकी यूनिट उपभोक्ता के खाते में दर्ज होती रहती है। वित्तीय वर्ष के अंत में बची हुई यूनिट का निर्धारित बायबैक दर पर भुगतान किया जाता है। यह राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर आगामी बिजली बिलों में समायोजित की जाती है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यूनिट का लेखा-जोखा फिर से शुरू होता है।


















