रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर के निलंबन की अनुशंसा की है। आयोग ने मामले में प्रथम दृष्टया चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को गंभीर मानते हुए यह सिफारिश की।
सुनवाई के दौरान आवेदिका ने बताया कि उसकी बहन को प्रसव के लिए उतई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि डॉक्टर द्वारा एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बावजूद पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए बिना और किसी स्वास्थ्यकर्मी को साथ भेजे बिना उसे जिला अस्पताल दुर्ग रेफर कर दिया गया। आवेदिका का कहना था कि करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 102 एंबुलेंस को लगभग एक घंटा लग गया, जिससे रास्ते में ही गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मामले से जुड़े दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद संबंधित डॉक्टर के निलंबन की अनुशंसा की गई।
तीन मामलों में सुलह से निकला समाधान
महिला आयोग ने अन्य तीन मामलों में भी सुनवाई कर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया। एक मामले में अंतरजातीय विवाह करने वाली महिला को समाज से बहिष्कृत करने की शिकायत पर संबंधित पक्ष ने आयोग के समक्ष लिखित आश्वासन दिया कि भविष्य में महिला और उसके परिवार के सामाजिक जीवन में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि दोबारा ऐसा होने पर महिला एफआईआर दर्ज करा सकती है। एक अन्य मामले में नगर सेना में कार्यरत पति को अपनी पुत्री का नाम सेवा अभिलेख में दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
वहीं घरेलू विवाद से जुड़े एक मामले में, जहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर पत्नी ने मारपीट और शराब के नशे में प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, आयोग की समझाइश के बाद दोनों पक्ष लिखित शर्तों के साथ सुलहनामे पर सहमत हो गए।


















