देश का सबसे कमाऊ Railway जोन, Chhattisgarh की न्यायधानी, और एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों का संचालन करने वाली कंपनी एसईसीएल का मुख्यालय… ये सारे तमगे Bilaspur के पास हैं। इसके बावजूद, देश की राष्ट्रीय राजधानी के लिए Bilaspur आज भी एक अदद सुपरफास्ट और प्रीमियम रात्रिकालीन ट्रेन कनेक्टिविटी के लिए तरस रहा है। Railway जब देश में वंदे भारत स्लीपर के जरिए लंबी दूरी के सफर की तस्वीर बदलने जा रही है, तब Bilaspur-नई Delhi रूद इसका सबसे पहला और सबसे मजबूत हकदार बनकर उभरता है। यदि इस रूट पर वंदे भारत स्लीपर की शुरूआत होती है, तो यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि Bilaspur और पूरे छत्तीसगढ़ के विकास का एक नया ग्रोथ इंजन साबित होगी।
इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए Delhi की टिकट पाना किसी लॉटरी से कम नहीं है। पिछले एक साल के आरक्षण और वेटिंग लिस्ट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। Bilaspur से Delhi जाने वाली राजधानी, संपर्क क्रांति और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में स्लीपर और थर्ड एसी की वेटिंग लिस्ट आम दिनों में भी 150 से पार रहती है। दिवाली, छठ, होली और गर्मियों की छुट्टियों में यह आंकड़ा 400 से अधिक या नो रूम तक पहुंच जाता है। तत्काल टिकट भी चंद सेकेंडों में खत्म हो जाते हैं। इस रूट की ट्रेनों के खचाखच भरे टॉयलेट के पास बैठे यात्रियों के वीडियो वायरल होते रहते हैं। यात्री पैसा देने को तैयार हैं, लेकिन कन्फर्म सीट नहीं मिलती। वंदे भारत स्लीपर के इस रूट पर आने से कम से कम 20 से 30 फीसदी रेगुलर और प्रीमियम पैसेंजर्स का दबाव कम होगा, जिससे अन्य ट्रेनों में आम यात्रियों को जगह मिल सकेगी।
एसईसीएल, हाईकोर्ट और Railway जोन का त्रिकोण
वंदे भारत चलाने का Bilaspur का दावा किसी बैसाखी पर नहीं, बल्कि इसके मजबूत आर्थिक आंकड़ों पर टिका है। उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर का सबसे मजबूत आधार यही तीन स्तंभ हैं। Bilaspur में स्थित एसईसीएल के अधिकारियों, कोयला कारोबारियों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच लगातार Delhi आना जाना लगा रहता है। वर्तमान में तेज कनेक्टिविटी न होने से इनका कीमती समय बर्बाद होता है। न्यायधानी होने के कारण सुप्रीम कोर्ट के वकील, बड़े कॉपोरेंट लीगल कंसलटेंट और न्याय जगत से जुड़े लोगों की Delhi-Bilaspur आवाजाही बहुत ज्यादा है। दक्षिण पूर्व मध्य Railway देश को सबसे ज्यादा कमा कर देता है। इसके बाद भी प्रीमियम यात्री सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
मरीज, छात्र, निवेश और पर्यटन वर्ग को होगा सीधा लाभ
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलने से मरीज और बुजुर्ग Delhi के एम्स, मेदांता या सफदरजंग जाने वाले गंभीर मरीजों को बिना झटके और कम समय में आरामदायक सफर मिलेगा। छात्र और युवाDelhi में यूपीएससी, सीए या उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले Bilaspur के हजारों छात्रों को घर आने-जाने में आसानी होगी। व्यापार और निवेशDelhi और एनसीआर के निवेशक Bilaspur और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों सिरगिट्टी, सिलतरा में आने से कतराते हैं क्योंकि सफर में वक्त लगता है। वंदे भारत से बिजनेस ट्रिप आसान होगी। वहीं अचानकमार टाइगर रिजर्व, रतनपुर और मल्हार जैसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के लिए Delhi से सीधे टूरिस्ट आ सकेंगे।
हवाई यात्रा बनाम रेल यात्रा कहां टिकेगी वंदे भारत ?
Bilaspur के चकरभाठा एयरपोर्ट से Delhi के लिए सीधी उड़ानें तो हैं, लेकिन उनका किराया और अनिश्चितता हमेशा आम और मध्यम-वर्गीय व्यवसायियों की जेब पर भारी पड़ती है। हवाई यात्रा में एयरपोर्ट पहुंचने, बोडिंग और सिक्योरिटी चेक में 3 घंटे पहले जाना पड़ता है। वंदे भारत स्लीपर रात को Bilaspur से छूटेगी और सुबह काम के वक्त Delhi पहुंचा देगी। यानी होटल का खर्च और दिन का समय दोनों बचेंगे। वंदे भारत स्लीपर का किराया फ्लाइट के आखिरी समय के महंगे टिकटों से काफी कम और सुलभहोगा, जिससे यह फ्लाइट की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद विकल्प बनेगी।
कमाऊ जोन को कब मिलेगा उसका हक
Bilaspur अब सिर्फ एक ट्रेन स्टॉपेज नहीं रह गया है, यह एक आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र है। वंदे भारत स्लीपर मिलने से Bilaspur की Delhi से दूरी समय के मामले में सिमट जाएगी। यह ट्रेन Bilaspur को केवल राष्ट्रीय राजधानी से नहीं जोड़ेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ के इस महत्वपूर्ण शहर को देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई देगी। अब गेंद Railway बोर्ड के पाले में है कि वह देश के सबसे कमाऊ जोन को उसका हक कब देता है।


















