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छत्तीसगढ़

बारिश के बाद बस्तर से Congress का जनआंदोलन

रायपुर. प्रदेश में जल, जंगल, जमीन बचाने भी बारिश के बाद बस्तर से बड़े जनआंदोलन की शुरूआत होगी. कांग्रेस संगठन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. इससे पहले कांग्रेस के आदिवासी नेता वनांचलों में छात्रावासों की जांच करेंगे. कांग्रेस की आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक में लिए गए फैसले के तहत बस्तर और सरगुजा समेत सभी मैदानी जिलों में भी छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था की जांच करने आदिवासी नेताओं की एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित होगी. यह दस सदस्यीय जांच समिति आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्था का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी. कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के तहत देश भर में आदिवासियों के अधिकारों के हनन और सुविधाओं को लेकर अभियान शुरू किया जा रहा है. यह निर्णय लिया गया है कि अब कोई सम्मेलन या सभा के बजाए सीधे आंदोलन किया जाए. जल, जंगल, जमीन बचाने बस्तर से जनआंदोलन का आगाज होगा. बारिश के तत्काल बाद सभी जिलों और ब्लॉकों तक आदिवासियों को संगठित किया जाएगा. बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी हितों के खिलाफ भाजपा सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसलों समेत संसाधनों को बेचे जाने का व्यापक विरोध करने की रणनीति बनी है.

इधर आंदोलन से पहले आदिवासी नेताओं की एक समिति दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचकर देखेगी कि आदिवासी छात्रावास मापदंडों के अनुरूप चल रहे हैं या नहीं. राज्य के छात्रावासों में लगातार कई घटनाएं सामने आती रही है. बस्तर के छात्रावासों में लगातार कुव्यवस्था के मामले उजागर हुए हैं. कन्या छात्रावासों में तो नाबालिग छात्रा से दुराचार तक के आरोप हैं. जांच समिति अचानक प्रदेश के छात्रावासों की जांच कर व्यवस्था पर रिपोर्ट देगी.

हमारी तैयारी चल रहीः आदिवासी कांग्रेस

छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष एवं विधायक जनकराम ध्रुव ने आरोप लगाए कि मोदी सरकार जल, जंगल, जमीन अपने चहेते उद्योगपतियों के हवाले कर रही है. जंगलों की अंधाधुंध कटाई के साथ वन क्षेत्रों के संसाधन बेचे जा रहे हैं. बस्तर से लेकर मैदानी क्षेत्रों से होते हुए सरगुजा तक यही हालात हैं. आदिवासियों को उजाड़ने के इस षड्यंत्र के खिलाफ लगातार आंदोलन चलाया जाएगा.

आदिवासी कांग्रेस का प्रशिक्षण

आंदोलन शुरू करने से पहले आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारियों को संबंधित विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा. सभी जिलों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित होंगे. इसमें वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून का खुलकर उल्लंघन, वन अधिकार पट्टे से वंचित करने और आदिवासी हितों को दरकिनार कर लिए जा रहे फैसलों पर चर्चा होगी. इसके अलावा फर्जी ग्रामसभा के प्रस्ताव और जबरिया आदिवासियों की जमीन छीने जाने के मामलों की भी निगरानी होगी.

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