हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। यह समय पूर्वजों या पितरों के प्रति आदर, श्रद्धा और कृतज्ञता जाहिर करने के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। पितृ पक्ष में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितर पृथ्वी लोक में आते हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। कहा जाता है कि श्राद्ध कर्म हमेशा शुभ समय और नियमों के साथ करने चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन महीने की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक रहते हैं। यह कुल 16 दिनों की अवधि होती है। जानें पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहे और कब समाप्त होंगे। पितृ पक्ष के पहले दिन श्राद्ध और पिंडदान का शुभ मुहूर्त।
पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहे हैं:
पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मान्य रहेंगे। 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, इसे श्राद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। पूर्णिमा तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई हो। प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर 2026 को है। मुख्य रूप से पितृ पक्ष आश्विन माह के कृष्ण प्रतिपदा तिथि से माने जाते हैं। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा।
श्राद्ध और तर्पण के लिए शुभ मुहूर्त:
शास्त्रों के अनुसार, पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए हमेशा दोपहर का समय ही उत्तम माना जाता है। इसके लिए मुख्य रूप से कुतुप और रोहिणी काल शुभ माने गए हैं। यहां देखें प्रतिपदा तिथि पर श्राद्ध और पिंडदान के शुभ मुहूर्त:
कुतुप मुहूर्त – दोपहर 01:17 बजे से दोपहर 02:05 बजे तक।
अवधि – 48 मिनट
रोहिणी मुहूर्त – दोपहर 02:05 बजे से दोपहर 02:53 बजे तक।
अवधि – 48 मिनट
अपराह्न काल – दोपहर 02:53 बजे से शाम 05:15 बजे तक।
अवधि – 02 घंटे 23 मिनट
पितृ पक्ष 2026 का कैलेंडर:
भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध- 26 सितंबर, शनिवार- पूर्णिमा
प्रतिपदा श्राद्ध- 27 सितंबर, रविवार
द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर, सोमवार
तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर, मंगलवार
चतुर्थी श्राद्ध- 30 सितंबर, बुधवार
पंचमी श्राद्ध- 1 अक्टूबर, गुरुवार
षष्ठी श्राद्ध- 2 अक्टूबर, शुक्रवार
सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध- 3 अक्टूबर, शनिवार
नवमी श्राद्ध- 4 अक्टूबर, रविवार (मातृ नवमी)
दशमी श्राद्ध- 5 अक्टूबर, सोमवार
एकादशी श्राद्ध- 6 अक्टूबर, मंगलवार
द्वादशी श्राद्ध- 7 अक्टूबर, बुधवार
त्रयोदशी श्राद्ध- 8 अक्टूबर, गुरुवार
चतुर्दशी श्राद्ध- 9 अक्टूबर, शुक्रवार
अमावस्या श्राद्ध- 10 अक्टूबर, शनिवार
श्राद्ध वाले दिन पंचबलि भोग निकालना:
श्राद्ध के दिन भोजन तैयर होने के बाद सबसे पहले 5 भागों में भोग निकाला जाता है। पहला गाय के लिए, कुत्ते के लिए, कौए के लिए, देवताओं/ चींटियों के लिए और ब्राह्मण के लिए। श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अनाज, तिल, गुड़ या दक्षिणा का दान देना चाहिए।
















